Ghatshila By-Election: घाटशिला विधानसभा उपचुनाव के तहत झामुमो महागठबंधन के प्रत्याशी सोमेश चंद्र सोरेन के समर्थन में मुसाबनी में आयोजित चुनावी सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सोमेश चंद्र सोरेन एक कोरा कागज हैं और घाटशिला के लोग जो चाहेंगे वही होगा. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में जोर देकर कहा कि मंत्री किसको बनाना है यह हम देखेंगे लेकिन घाटशिला की जनता की इच्छा सर्वोपरि रहेगी. सोमवार को हुई इस सभा में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे हेमंत सोरेन ने पूर्व मंत्री स्वर्गीय रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश को युवा और मेहनती नेता बताते हुए जनता से अपील की कि वे उन्हें भारी मतों से विजयी बनाएं ताकि रामदास दा के अधूरे सपनों को साकार किया जा सके.
घाटशिला विधानसभा सीट पर 11 नवंबर को उपचुनाव होने हैं जो स्वर्गीय रामदास सोरेन के असामयिक निधन के कारण रिक्त हुई है. सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड अलग राज्य आंदोलन के महान योद्धा रामदास दा के दिलों में बसे होने का जिक्र करते हुए कहा कि घाटशिला की जनता ने उन्हें जो स्नेह दिया था वैसा ही प्यार और आशीर्वाद उनके बड़े बेटे सोमेश को भी मिलना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि झारखंड में व्यापारियों की सरकार नहीं बल्कि आदिवासी मूलवासियों की सरकार है और झामुमो गठबंधन ने विकास के साथ साथ आदिवासियों को उनके हक अधिकार दिलाने का काम किया है. सोरेन ने चेतावनी दी कि चुनाव के दौरान गांव-गांव में कई नेता आकर बरगलाने का प्रयास करेंगे इसलिए सभी को सतर्क रहना चाहिए और झामुमो प्रत्याशी को मजबूत समर्थन देना चाहिए.
उन्होंने कहा कि सोमेश चंद्र सोरेन घाटशिला के बेटे की तरह हैं जो विधानसभा क्षेत्र में विकास को गति देंगे. पार्टी ने कई विधायकों को बनाया है और कई को टूटते बिकते भी देखा है इसलिए जनता से अपील है कि वे सोमेश को विधानसभा भेजें. सभा में मंत्री दीपक बिरुआ ने भी भाषण दिया. अवसर पर पूर्व विधायक कुणाल सारंगी, लक्ष्मण टुडू, पूर्व सांसद सुमन महतो, बाघराय मांडी, गौरांग माहली सहित बड़ी संख्या में समर्थक उपस्थित थे.
मुसाबनी की चुनावी सभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कुशल रणनीति का परिचय दिया. स्वर्गीय रामदास सोरेन की विरासत को भावनात्मक आधार बनाते हुए उनके पुत्र सोमेश चंद्र सोरेन को जनता का बेटा और कोरा कागज बताकर उन्होंने दो संदेश एक साथ दिए. पहला यह कि सोमेश में कोई पूर्वाग्रह नहीं है और वह जनता की इच्छा के अनुरूप काम करेंगे. दूसरा यह कि मंत्री पद जैसे महत्वपूर्ण फैसले पार्टी हाईकमान के पास रहेंगे जिससे स्थानीय स्तर पर असंतोष की गुंजाइश कम हो. यह बयान झामुमो के भीतर गुटबाजी और टिकट वितरण को लेकर चल रही अटकलों पर लगाम कसने का प्रयास है. आदिवासी मूलवासी कार्ड खेलकर उन्होंने एनडीए के बाबूलाल सोरेन के अभियान को सीधे चुनौती दी है. सभा में दीपक बिरुआ, कुणाल सारंगी और सुमन महतो जैसे दिग्गजों की मौजूदगी से गठबंधन की एकजुटता का संदेश गया. उपचुनाव में रामदास की सहानुभूति लहर और संगठन की मजबूती झामुमो के पक्ष में दिख रही है लेकिन भाजपा भी आदिवासी वोट बैंक पर दावा ठोक रही है. यह मुकाबला संगठन बनाम सहानुभूति का रोचक द्वंद्व बनता दिख रहा है.