Palamu News: पलामू में रोजगार और अनाज के नाम पर करोड़ों की ठगी का मामला सामने आया है. आरोप है कि एक कथित नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी ने सस्ते अनाज और रोजगार का लालच देकर ग्रामीणों से लाखों रुपये वसूले हैं. पीड़ितों की शिकायत के बाद पलामू जिला प्रशासन ने चैनपुर थाना को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है.
जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से पलामू और गढ़वा जिलों के विभिन्न इलाकों में एक कंपनी सक्रिय थी, जो ग्रामीणों को सदस्य बनाकर नेटवर्क मार्केटिंग के जरिए अनाज और नौकरी देने का वादा कर रही थी. सदस्य बनने के लिए लोगों से 350 रुपये की राशि ली गई और बदले में 2 से 10 किलो चावल देने की बात कही गई.
ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी ने गांव-गांव में पीडीएस जैसी व्यवस्था तैयार की थी. स्थानीय लोगों को डीलर बनाया गया और उन्हें 5000 रुपये मासिक वेतन का भरोसा दिया गया. वहीं एजीएम के पद पर रहने वालों को 16000 रुपये मासिक वेतन देने का वादा किया गया. इसी बहाने कंपनी ने एक-एक गांव से लाखों रुपये वसूल लिए.
पीड़ितों ने जब अपनी शिकायत पलामू डीसी समीरा एस को दी तो उन्होंने तत्काल कार्रवाई करते हुए एसपी रीष्मा रमेशन को जांच का निर्देश दिया. इसके बाद एसपी ने चैनपुर थाना प्रभारी को मामले की जांच कर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है.
चैनपुर थाना प्रभारी श्रीराम शर्मा ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि एसपी को कंपनी से जुड़ी कई शिकायतें मिली थीं. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.
बताया जा रहा है कि जिस कंपनी पर ठगी का आरोप लगा है, उसका नेटवर्क न केवल पलामू प्रमंडल बल्कि बिहार के गया और औरंगाबाद जिलों तक फैला हुआ है. कंपनी से हजारों लोग जुड़े हुए हैं. एक शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने अपने इलाके से करीब छह लाख तीस हजार रुपये कंपनी को जमा कराए थे, लेकिन न तो अनाज मिला और न ही रोजगार.
यह मामला एक बार फिर उस सच्चाई को सामने लाता है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में लोगों की बेरोजगारी और सस्ते अनाज की चाह किस तरह ठग गिरोहों के लिए अवसर बन जाती है. सरकारी योजनाओं की जानकारी के अभाव में ग्रामीण आसानी से जाल में फंस जाते हैं. जरूरत है कि प्रशासन ऐसे फर्जी नेटवर्कों पर समय रहते कार्रवाई करे और जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को इन कंपनियों के झांसे से बचाए.