Bihar Elections 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का प्रचार आज शाम पांच बजे थम जाएगा. इसके बाद राज्य के 20 जिलों की 122 सीटों पर 11 नवंबर को मतदान होगा. चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रचार थमने के बाद किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार द्वारा सभा, जुलूस या रोड शो नहीं किया जा सकेगा.
दूसरे चरण में जिन जिलों में वोट डाले जाएंगे, उनमें पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई, नवादा, गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल, कैमूर और रोहतास शामिल हैं. यह चरण राज्य की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है क्योंकि इस चरण में कई दिग्गज मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के कई मंत्री इस चरण में मैदान में हैं. इनमें सुपौल से बिजेंद्र प्रसाद यादव, चकाई से सुमित कुमार सिंह, झंझारपुर से नीतीश मिश्रा, अमरपुर से जयंत राज, छातापुर से नीरज कुमार सिंह बबलू, बेतिया से रेणु देवी, धमदाहा से लेशी सिंह, हरसिद्धि से कृष्णनंदन पासवान और चैनपुर से जमा खान चुनावी जंग लड़ रहे हैं.
वहीं महागठबंधन की ओर से राजद, कांग्रेस और भाकपा माले के बड़े नेता भी इस चरण में अपनी साख बचाने की कोशिश कर रहे हैं. राजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम, कटिहार की कदवा सीट से कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान और भाकपा माले के नेता महबूब आलम इस चरण में प्रमुख उम्मीदवारों में शामिल हैं.
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, दूसरे चरण में कुल 1302 उम्मीदवार मैदान में हैं. इनमें 1165 पुरुष और 136 महिला उम्मीदवार शामिल हैं, जबकि एक उम्मीदवार थर्ड जेंडर से है. इन सभी की किस्मत का फैसला 11 नवंबर को होगा और मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी.
पहले चरण में इस बार आजादी के बाद सर्वाधिक 65 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था. महिलाओं ने एक बार फिर मतदान में पुरुषों से आगे रहकर अपनी भूमिका को मजबूत किया. पहले चरण में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 69.04 रहा जबकि पुरुषों का 61.56 प्रतिशत दर्ज किया गया.
बिहार विधानसभा चुनाव का दूसरा चरण सत्ता के समीकरण तय करने वाला साबित हो सकता है. इस चरण में जहां नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के कई वरिष्ठ मंत्री मैदान में हैं, वहीं विपक्षी गठबंधन भी अपनी पूरी ताकत झोंके हुए है. खास बात यह है कि पहले चरण में महिलाओं की बड़ी भागीदारी ने राजनीतिक दलों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दूसरे चरण में भी वही उत्साह दिखेगा या नहीं. दूसरी ओर, सीमांचल और मगध क्षेत्रों की सीटें इस बार सत्ता की कुंजी तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं.