UP News: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में पुलिस ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए जेल में बंद गैंगस्टर राजेश मिश्रा के घर से करोड़ों रुपये की नकदी और नशीले पदार्थ बरामद किए. यह कार्रवाई मानिकपुर थाना क्षेत्र के मुंदीपुर गांव में की गई जहां पुलिस को छापेमारी के दौरान इतना ज्यादा कैश मिला कि नोट गिनने के लिए चार मशीनें मंगानी पड़ीं.
घर में बिस्तरों और अलमारियों पर नोटों के ढेर
घर में बिस्तरों और अलमारियों पर नोटों के ढेर बिखरे पड़े थे. पुलिस टीम ने शनिवार सुबह से लेकर अगले दिन तक गिनती जारी रखी. करीब 22 घंटे चली इस प्रक्रिया के बाद कुल दो करोड़ एक लाख पचपन हजार रुपये नकद बरामद हुए. अधिकांश नोट 10, 20, 50 और 100 रुपये के थे. इसके अलावा 6.075 किलो गांजा और 577 ग्राम स्मैक भी जब्त की गई जिनकी अनुमानित बाजार कीमत तीन करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है.
छापेमारी के समय घर में राजेश मिश्रा की पत्नी रीना मिश्रा, बेटा विनायक, बेटी कोमल और रिश्तेदार यश व अजीत मिश्रा मौजूद थे. पुलिस को देखते ही दरवाजा बंद कर दिया गया. काफी मशक्कत के बाद जब दरवाजा खुलवाया गया तो अंदर का नजारा देखकर पुलिसकर्मी दंग रह गए. कमरे के हर कोने में नोटों की गड्डियां, प्लास्टिक की थैलियों में भरा गांजा और ट्रंक में रखी स्मैक मिली.
पुलिस ने मौके से रीना मिश्रा, बेटा विनायक, बेटी कोमल और यश कुमार को हिरासत में लिया है. पूछताछ में पता चला कि गिरोह पिछले कई सालों से अंतरराज्यीय स्तर पर नशे के कारोबार में लिप्त है. बिहार और मध्य प्रदेश तक इसके नेटवर्क फैले हैं.
छानबीन में यह भी सामने आया कि रीना मिश्रा और उसका बेटा विनायक मिश्रा ने राजेश की जेल से रिहाई के लिए फर्जी जमानत दस्तावेज तैयार किए थे. इस मामले में उन पर धोखाधड़ी और जालसाजी के साथ गैंगस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इससे पहले भी इस परिवार की तीन करोड़ छह लाख से अधिक की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है.
जेल में रहते हुए भी गिरोह की गतिविधियों पर नजर था राजेश
स्थानीय पुलिस का कहना है कि राजेश मिश्रा जेल में रहते हुए भी गिरोह की गतिविधियों पर नजर रखता था. उसकी पत्नी रीना ही नेटवर्क का संचालन करती थी. गांव के लोगों के मुताबिक, रीना का खौफ इतना था कि कोई उसके घर की ओर देखने की हिम्मत नहीं करता था. घर पर आए दिन ट्रक और अजनबी लोगों की आवाजाही रहती थी, लेकिन कोई बोलता नहीं था.
पुलिस ने बताया कि गिरोह की गतिविधियां प्रतापगढ़, प्रयागराज, कौशांबी, बिहार और मध्य प्रदेश के बीच फैली हुई थीं. राजेश मिश्रा फोन के जरिए जेल से ही सौदों की निगरानी करता था. गिरोह के सदस्य यह भी जानते थे कि किस इलाके में कब पुलिस की तैनाती होती है.
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश में नशे और अपराध के नेटवर्क पर सबसे बड़ी चोट मानी जा रही है. तीन पीढ़ियों से चल रहे इस काले धंधे ने पूरे इलाके की छवि खराब कर दी थी. पुलिस की इस कार्रवाई से यह साफ है कि नशा कारोबारियों के खिलाफ अब सख्त रणनीति अपनाई जा रही है. हालांकि यह भी सवाल उठता है कि जेल में बंद रहते हुए भी राजेश मिश्रा जैसा अपराधी कैसे इतना बड़ा नेटवर्क संचालित कर रहा था. इस मामले ने जेल प्रशासन और पुलिस इंटेलिजेंस सिस्टम की कमजोरी को भी उजागर कर दिया है.