Jharkhand News: झारखंड सरकार ने राज्य कर्मियों के वेतन निर्धारण में हुई गड़बड़ियों पर सख्त रुख अपनाया है. वित्त विभाग ने उन कर्मचारियों से अधिक भुगतान की राशि की वसूली का आदेश जारी किया है, जिनका वेतन गलत तरीके से तय किया गया था. इस संबंध में विभाग ने सभी उपायुक्तों, वरीय पुलिस अधीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों, जिला लेखा पदाधिकारियों और जिला शिक्षा अधीक्षकों को पत्र लिखा है.
वित्त विभाग के मुताबिक, 13 अगस्त 2014 को छठे वेतन पुनरीक्षण के तहत एक फिटमेंट टेबल तैयार किया गया था. लेकिन 11 सितंबर 2014 को वित्त विभाग ने उसके कार्यान्वयन पर रोक लगा दी थी. इसके बाद महालेखाकार कार्यालय ने भी इस पर आपत्ति जताई थी. लंबी समीक्षा के बाद 26 मार्च 2018 को सरकार ने 13 अगस्त 2014 के संकल्प को उसी तिथि से निरस्त कर दिया था.
विभाग ने स्पष्ट किया है कि छठे पुनरीक्षित वेतनमान में वेतन निर्धारण केवल वित्त विभाग के 28 फरवरी 2009 के प्रावधानों के तहत ही किया जाना चाहिए था. पहले भी इस संबंध में निर्देश दिए गए थे. बावजूद इसके कई जिलों में अब भी वेतन निर्धारण निरस्त संकल्प 13 अगस्त 2014 के आधार पर किया जा रहा है. वित्त विभाग ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता माना है और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है.
विभाग ने निर्देश दिया है कि गलत तरीके से हुए भुगतान की वसूली नियमानुसार की जाए और पूरी प्रक्रिया नवंबर 2025 तक पूरी कर ली जाए.
सरकार का यह कदम उन वित्तीय अनियमितताओं पर लगाम लगाने की दिशा में उठाया गया है जो वर्षों से विभागीय लापरवाही के कारण जारी थीं. लेकिन इस आदेश से कई कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की संभावना है. कई ऐसे मामले भी सामने आ सकते हैं, जहां कर्मचारियों को वेतन निर्धारण की प्रक्रिया की जानकारी तक नहीं थी. ऐसे में वसूली को लेकर असंतोष और विवाद की स्थिति बन सकती है. सरकार को चाहिए कि जिन कर्मियों से राशि वसूली जानी है, उन्हें सुनवाई का अवसर भी दिया जाए ताकि यह कार्रवाई न्यायसंगत और पारदर्शी बनी रहे.