Bihar Election Result LIVE: बिहार की जनता ने जो जनादेश दिया है वह अब बिहार ही नहीं आने वाले चुनावों में विपक्ष के लिए बहुत सीख दे गई है. महागठबंधन का ओवर कॉन्फिडेंस उन्हें ले डूबा. आपस में लड़ाई और समय पर सीटों का बंटवारा न होना और इसके बाद मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के लिए उम्मीदवारों का ऐलान करना महागठबंधन को खा गया. बहरहाल नीचे ताजा रुझान आप देख सकते हैं.
एनडीए- 201
- बीजेपी 89
- जदयू 84
- लोजपा आर 19
- आरएलएम 5
- हम 3
महागठबंधन - 36
- राजद 25
- कांग्रेस 6
- लेफ्ट 3
- वीआइपी 0
- आइआइपी 0

- बिहार में चुनावी तस्वीर लगभग साफ होने के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर एनडीए की अहम बैठक जारी है. मुख्यमंत्री आवास पर बुलायी गई इस बैठक में गठबंधन के प्रमुख नेता मौजूद हैं. उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी बैठक में शामिल होने पहुंचे. माना जा रहा है कि यह बैठक नतीजों के बाद की राजनीतिक स्थिति, सरकार गठन की संभावनाओं और आगामी रणनीति को लेकर निर्णायक साबित हो सकती है.

- उधर, कल्याणपुर विधानसभा सीट से जेडीयू उम्मीदवार महेश्वर हज़ारी ने बड़ी जीत दर्ज की है. चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार हज़ारी ने सीपीआई (एम) के उम्मीदवार रंजीत कुमार राम को 38,586 वोटों से हराया. बड़े अंतर से मिली इस जीत के बाद जेडीयू खेमे में उत्साह का माहौल है.
- बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के रूझानों ने राज्य की सियासत में सबसे बड़ा उलटफेर ला दिया है. यह उलटफेर सिर्फ एनडीए की बढ़त या इंडिया गठबंधन की हार भर नहीं है, बल्कि 20 साल बाद पहली बार यह स्थिति बनती दिख रही है कि नीतीश कुमार के बिना भी सरकार आराम से बनाई जा सकती है. एनडीए में शामिल भाजपा अब ऐसी स्थिति में है कि गठबंधन धर्म तोड़े बिना अपना मुख्यमंत्री दे सकती है.
- 243 सदस्यीय विधानसभा में रूझानों के मुताबिक भाजपा 96 सीटों पर आगे है. जदयू 84 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. लोक जनशक्ति (रामविलास) पार्टी 19 सीटों पर आगे है. हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा 4 सीटों पर बढ़त बना रही है.
- अगर एनडीए जदयू को अलग भी कर दे, तो भाजपा और उसके सहयोगी दल 124 सीटें जुटा ले रहे हैं, जो बहुमत से दो अधिक है. ऐसे में यह चर्चा तेज हो गई है कि भाजपा अपने मुख्यमंत्री का नाम आगे बढ़ाने की पेशकश कर सकती है. अगर नीतीश इस पर सहमत नहीं होते हैं, तो भाजपा गठबंधन के अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार बनाने की स्थिति में दिखाई दे रही है. पिछली बार की तरह निर्दलीय और एआईएमआईएम विधायक भी भाजपा खेमे में शामिल होने को तैयार बताए जा रहे हैं.
- ऐसी स्थिति में जदयू के भीतर टूट की संभावना भी बढ़ सकती है. पार्टी के भीतर दो धड़े होने की चर्चा चुनाव से पहले ही शुरू हो गई थी, एक नीतीश का जदयू और दूसरा भाजपा का जदयू. अगर भाजपा अलग सरकार बनाती है, तो जदयू के वे विधायक जो भाजपा के करीब हैं, पार्टी छोड़ने का रास्ता चुन सकते हैं. उनके लिए सत्ता में रहना विपक्ष में बैठने से स्वाभाविक तौर पर अधिक फायदेमंद होगा. यही स्थिति राजद में भी देखी जा रही है, जहां खुद तेजस्वी यादव अपने भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती झेल रहे हैं.
- हालांकि नतीजे अब भी अंतिम रूप से सामने नहीं आए हैं और आखिरी क्षणों में समीकरण बदल सकते हैं, लेकिन भाजपा जिस तरह महाराष्ट्र में राजनीतिक रणनीति लागू कर चुकी है, वैसी कोशिश बिहार में भी दोहराई जा सकती है. पार्टी के कई नेता इस संभावना के संकेत पहले भी दे चुके हैं.
- इस चुनाव में कई मिथक टूट गए. कांग्रेस का फिर एक बार लगभग सफाया हो गया है. वह मात्र एक सीट पर आगे चल रही है और उसकी जीत की संभावना बेहद कम है. राजद की स्थिति भी बदतर है, पार्टी कई सीटों पर संघर्षरत है. वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी की पार्टी कहीं भी बढ़त हासिल नहीं कर पाई है.
- एनडीए की प्रचंड बढ़त के पीछे एक बड़ी वजह वोटिंग से ठीक पहले करीब 1.50 करोड़ मतदाताओं के खातों में 10-10 हजार रुपये भेजे जाने को माना जा रहा है. यह फॉर्मूला कितना सही, कितना गलत है, इस पर बहस हो सकती है, लेकिन यह समझा जा रहा है कि इसका सीधा लाभ एनडीए को मिला है.
- हम पार्टी शानदार प्रदर्शन कर रही है और अभी 6 में से सभी 6 सीटों पर आगे चल रही है. चिराग पासवान की पार्टी भी मजबूत स्थिति में है, 29 में से 20 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है.
- उधर, राघोपुर सीट पर तेजस्वी यादव के लिए चुनाव किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है. यह सीट हमेशा से लालू यादव परिवार की परंपरागत मानी जाती रही है, लेकिन इस बार मुकाबला बेहद कड़ा हो गया है. भाजपा के सतीश कुमार यादव ने तेजस्वी को कड़ी टक्कर दी है और कई राउंड की गिनती के बाद तेजस्वी पीछे चल रहे हैं. सतीश इससे पहले 2010 में राबड़ी देवी को हराने के बाद इलाके में मजबूत नेता के रूप में उभरे थे. इस बार उन्हें भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है और राघोपुर की लड़ाई प्रतिष्ठा की बन चुकी है.
- 13 राउंड की गिनती के बाद सतीश कुमार को 51,708 वोट मिले हैं, जबकि तेजस्वी यादव को 47,300 वोट मिले हैं. तेजस्वी 4,408 वोटों से पीछे चल रहे हैं.
- इधर भागलपुर जिले की सभी सात विधानसभा सीटों पर एनडीए ने मजबूत बढ़त कायम कर रखी है. भागलपुर सदर सीट से भाजपा प्रत्याशी रोहित पांडेय 25वें राउंड की गिनती के बाद 2,351 वोटों से आगे चल रहे हैं. नाथनगर में पुष्पा रामविलास की समर्थित उम्मीदवार मिथुन कुमार पांच हजार वोटों की बढ़त बनाए हुए हैं. इसी तरह कहलगांव सीट पर जदयू प्रत्याशी की जीत लगभग पक्की मानी जा रही है, जहां वे 41 हजार से अधिक वोटों से आगे हैं. पीरपैंती में भाजपा उम्मीदवार मुरारी पासवान की जीत भी तय मानी जा रही है. वे 42 हजार वोटों की भारी बढ़त बनाए हुए हैं.
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- कुल मिलाकर बिहार चुनाव का रुख अब पूरी तरह से एनडीए के पक्ष में जाता दिख रहा है. रुझानों के आधार पर गठबंधन दो सौ सीटों के आंकड़े को पार करता नजर आ रहा है. एक बार फिर एनडीए सरकार बनने के संकेत साफ हैं.
- उधर, नतीजों पर राजद ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह जीत ईवीएम की सुनामी है. राजनीतिक हलकों में इस बयान की काफी चर्चा है. वहीं जनसुराज की ओर से बताया गया है कि प्रशांत किशोर 16 नवंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बिहार चुनाव परिणाम और संगठन की आगे की रणनीति पर विस्तृत चर्चा करेंगे. मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अनंत सिंह ने मोकामा विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर ली है.
- मुजफ्फरपुर के साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार राजू सिंह ने चुनाव जीत लिया है. इसी तरह पश्चिम चम्पारण के लौरिया सीट से भाजपा के विनय बिहारी ने जीत दर्ज की है. प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार विनय बिहारी ने लगभग चौबीस हजार वोटों के अंतर से वीआईपी उम्मीदवार रणकौशल सिंह को पराजित किया है. हालांकि चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है.
36 में से 29 मंत्रियों की किस्मत दांव पर, अब तक के रुझानों में ज्यादातर आगे
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना जारी है और रुझानों में राज्य की नीतीश सरकार के ज्यादातर मंत्री बढ़त बनाए हुए हैं. कुल 36 मंत्रियों में से 29 मंत्रियों की किस्मत आज मतगणना से तय होनी है. शुरुआती रुझान एनडीए के लिए राहत भरे रहे हैं, जहां भाजपा के 16 और जेडीयू के 13 मंत्री मजबूत स्थिति में दिख रहे हैं.
जेडीयू के मंत्री, लगभग सभी बढ़त में
जेडीयू के जिन मंत्रियों ने शुरुआती राउंड में ही बढ़त बना ली है, उनमें
रत्नेश सदा (सोनवर्षा)
सुनील कुमार (भोरे)
महेश्वर हजारी (कल्याणपुर)
विजय कुमार चौधरी (सराय रंजन)
श्रवण कुमार (नालंदा)
शीला कुमारी मंडल (फुलपरास)
बिजेंद्र प्रसाद यादव (सुपौल)
लेसी सिंह (धमदाहा)
जयंत राज (अमरपुर)
मो. जामा खान (चैनपुर)
सुमित कुमार सिंह (चकाई)
मदन सहनी (बहादुरपुर)
सभी आरामदायक बढ़त बनाए हुए हैं और उनके खेमे में खुशी का माहौल है.
बीजेपी के मंत्री, लगभग एकतरफा बढ़त
बीजेपी के खाते से
संजय सरोजी (दरभंगा सदर)
जीवेश कुमार मिश्र (झाले)
राजू कुमार सिंह (साहेबगंज)
कृष्णा कुमार मंटू (अमनौर)
मंगल पांडे (सीवान)
सुरेंद्र मेहता (बछवाड़ा)
डॉ. सुनील कुमार (बिहारशरीफ)
नितिन नवीन (बांकीपुर)
विजय कुमार सिन्हा (लखीसराय)
सम्राट चौधरी (तारापुर)
रेणु देवी (बेतिया)
कृष्णानंदन पासवान (हरसिद्धि)
नीतीश मिश्रा (झंझारपुर)
नीरज कुमार सिंह बबलू (छातापुर)
विजय कुमार मंडल (सिकटी)
प्रेम कुमार (गया टाउन)
सभी मजबूती से आगे चल रहे हैं और निर्णायक बढ़त की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं.
एकमात्र मंत्री जो पीछे चल रहे
कुढ़नी से भाजपा के केदार प्रसाद गुप्ता फिलहाल पीछे चल रहे हैं, जिससे बीजेपी खेमे में इस सीट को लेकर चिंता बनी हुई है.
कुल मिलाकर, रुझान एनडीए के पक्ष में जाते दिख रहे हैं और मंत्रीपद की परीक्षा दे रहे नेताओं के लिए राहत की खबरें लगातार आती जा रही हैं. अंतिम परिणामों का इंतजार अभी जारी है.
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सूबे की 243 सीटों पर दो चरणों में पड़े वोटों की गिनती राज्य के 46 मतगणना केंद्रों पर चल रही है. इस बार मुकाबला दो ध्रुवों, एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधा देखा जा रहा है. नीतीश कुमार जहां मतदान से पहले ही जीत का दावा कर चुके थे, वहीं तेजस्वी यादव ने भी 18 नवंबर को शपथ लेने का दावा किया था.
एग्जिट पोल के अनुसार महिलाओं, ओबीसी और ईबीसी वर्ग का समर्थन एनडीए के पक्ष में जाने की संभावना जताई गई थी. अब नतीजे तय करेंगे कि सत्ता की बागडोर किसके हाथ में जाएगी. क्या नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री बनेंगे या तेजस्वी यादव बिहार की राजनीति में नया अध्याय लिखेंगे.
मतगणना की शुरुआत पोस्टल बैलेट से हुई. इसके बाद ईवीएम के वोटों की गिनती जारी है. 243 सीटों में बहुमत के लिए 122 सीटें जरूरी हैं. मतगणना के मद्देनजर प्रशासन ने सभी जिलों में सुरक्षा के सख्त प्रबंध किए हैं. चुनाव आयोग भी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है.
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- बिहार विधानसभा चुनाव की मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों में एआईएमआईएम ने सीमांचल क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है. निर्वाचन आयोग के ताजा अपडेट के अनुसार पार्टी तीन सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. कोचाधामन से मोहम्मद सरवर आलम 11156 वोट से आगे हैं. अमौर में अख्तरुल ईमान 14262 वोट की बढ़त के साथ बढ़त बनाए हुए हैं. जबकि बायसी में गुलाम सरवर 5756 मतों से आगे चल रहे हैं. तीनों सीटें मुस्लिम बहुल सीमांचल इलाके में आती हैं जहां एआईएमआईएम का आधार लगातार मजबूत होता दिख रहा है.
- दोपहर 12 बजे तक आयोग के आंकड़ों के अनुसार राजग 243 में से 186 सीटों पर आगे था. वहीं महागठबंधन 46 सीटों तक सीमित नजर आया. एआईएमआईएम ने इस बार किसी भी गठबंधन से दूरी बनाकर स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया था. हालांकि कई सीटों की मतगणना अभी जारी है और रुझानों में बदलाव की संभावना बनी हुई है.
- छपरा विधानसभा सीट पर शुरुआती रुझानों में राजद उम्मीदवार खेसारी लाल यादव पिछड़ गए हैं. ताजा जानकारी के अनुसार भाजपा उम्मीदवार छोटी कुमारी लगभग 3085 वोटों की बढ़त बनाए हुए हैं. अब तक चार राउंड की मतगणना पूरी हो चुकी है और आगे 28 राउंड तक गिनती जारी रहेगी.
- मतगणना के शुरुआती चरण में मिले इन आंकड़ों से मुकाबले की तस्वीर साफ नहीं हो पाई है और आगे की गिनती में बढ़त किसके पक्ष में जाएगी, यह देखना अहम होगा.
- रुझानों में जेडीयू सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरती दिखाई दे रही है. नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच चली सियासी जंग का फैसला कुछ ही घंटों में साफ हो जाएगा. मतगणना से पहले नीतीश कुमार ने जीत को लेकर भरोसा जताया था, जबकि तेजस्वी यादव ने दावा किया था कि वे 18 नवंबर को शपथ लेंगे. अब तस्वीर यह बताएगी कि सत्ता में वापसी किसकी होगी.
- एग्जिट पोल में एनडीए को महिलाओं, ओबीसी और ईबीसी वर्ग से मजबूत समर्थन मिलने का अनुमान जताया गया था और शुरुआती रुझान उस अनुमान को सही साबित करते प्रतीत हो रहे हैं. बहुमत के लिए 122 सीटों की जरूरत है और एनडीए रुझानों में इस आंकड़े से काफी आगे दिखाई दे रहा है.
- मतगणना केंद्रों पर पहले पोस्टल बैलेट की गिनती की जा रही है, इसके बाद ईवीएम का डेटा सामने आ रहा है. प्रशासन ने सभी जिलों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और आयोग ने तैयारियों की समीक्षा पहले ही कर ली थी.
रुझानों के मुताबिक जदयू इस बार भी सबसे बड़ी पार्टी बनने की राह पर आगे बढ़ रही है. भाजपा और जदयू की जोड़ी ने शुरुआती दौर में ही बढ़त सुनिश्चित कर ली है. कई सीटों पर एनडीए के प्रत्याशी निर्णायक बढ़त हासिल कर चुके हैं. चुनाव आयोग की ओर से जारी ताजा आंकड़ों में बताया गया है कि दिन बढ़ने के साथ स्थिति और स्पष्ट होगी और देर शाम तक यह तय हो जाएगा कि बिहार की कमान किसके हाथ में जाएगी.
बिहार में इस बार रिकॉर्ड मतदान हुआ है. दो चरणों में सम्पन्न हुए चुनाव में कुल 67.13 प्रतिशत वोट दर्ज किए गए जो 1951 के बाद सर्वाधिक है. पहले चरण की वोटिंग छह नवंबर और दूसरे चरण की वोटिंग ग्यारह नवंबर को हुई थी. बहुमत के लिए 122 सीटों की जरूरत है और रुझानों के अनुसार एनडीए इस आंकड़े को पार कर चुका है. लगभग सभी एक्जिट पोल ने एनडीए की जीत का अनुमान जताया था और रुझान भी वही कहानी दोहरा रहे हैं.
एनडीए के बढ़ते कदमों के बीच महागठबंधन के कई दिग्गज पीछे चल रहे हैं. कुछ सीटों पर कांटे की टक्कर की स्थिति भी बन रही है लेकिन समग्र रुझान एनडीए की वापसी की ओर इशारा कर रहे हैं.
शुरुआती रुझानों से साफ है कि बिहार में सत्ता परिवर्तन की संभावनाएं धुंधली पड़ गई हैं. नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जदयू ने अपने संगठन और गठबंधन की ताकत को कायम रखा है. इतने बड़े पैमाने पर हुए मतदान के बाद यह परिणाम बताता है कि ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी वोटरों तक में एनडीए के प्रति भरोसा बरकरार रहा है. महागठबंधन की बिखरी रणनीति और सीटों पर स्थानीय समीकरणों का अभाव उसे भारी पड़ता दिख रहा है. अंतिम परिणाम आने तक तस्वीर का इंतजार रहेगा लेकिन रुझान यह स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि बिहार की राजनीति में इस बार भी एनडीए की पकड़ मजबूत बनी हुई है.