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  • 2025-11-15

Office Romance: ऑफिस रोमांस के मामलों में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर पहुंचा

Office Romance: भारत ने ऑफिस रोमांस के मामलों में कई विकसित देशों को पीछे छोड़ दिया है. एशली मैडिसन और यूगोव की संयुक्त अंतरराष्ट्रीय स्टडी के मुताबिक भारत इस सूची में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है. स्टडी में 11 देशों के 13 हजार से अधिक वयस्कों को शामिल किया गया था जिनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, इटली, ब्राजील, मेक्सिको, स्विट्जरलैंड, स्पेन, यूके और यूएस जैसे देश शामिल थे.

भारत में वर्कप्लेस रोमांस के मामले तेजी से बढ़ें
रिपोर्ट में पाया गया कि भारत में वर्कप्लेस रोमांस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और ऑफिस में साथ काम करने वाले लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रहा है. स्टडी के अनुसार भारत में लोगों ने स्वीकार किया कि लंबे समय तक साथ काम करने, रोजाना घंटों तक बातचीत और एक दूसरे पर निर्भर रहने से ऑफिस में रिलेशनशिप बनने की संभावना काफी बढ़ गई है.

ऑफिस रोमांस का अर्थ
ऑफिस रोमांस का अर्थ कार्यस्थल पर दो सहकर्मियों के बीच रोमांटिक या शारीरिक संबंध से है. यह रिश्ता समान उम्र वालों में भी हो सकता है और उम्र के अंतर वाले सहकर्मियों के बीच भी. कई मामलों में यह रिश्ता शादीशुदा व्यक्तियों और सिंगल लोगों के बीच भी सामने आया है.

विशेषज्ञों के अनुसार ऑफिस रोमांस का असर दो तरह से देखा जाता है. कुछ मामलों में यह रिश्ता लोगों के निजी जीवन और काम को संतुलित करने में मुश्किल खड़ी कर देता है. फेवरटिज्म और कार्यस्थल पर असहजता भी इसकी वजह से पैदा हो सकती है. वहीं दो सिंगल सहकर्मियों के बीच रिश्ते कई बार शादी तक पहुंच जाते हैं. हालांकि ब्रेकअप की स्थिति में प्रोफेशनल माहौल बिगड़ने का खतरा ज्यादा रहता है.

भारत में ऑफिस रोमांस को लेकर कोई कानूनी रोक नहीं
भारत में ऑफिस रोमांस को लेकर कोई कानूनी रोक नहीं है लेकिन ज्यादातर कंपनियों की आचार संहिता में इससे जुड़े नियम स्पष्ट होते हैं. कई संस्थान ऑफिस रिलेशनशिप को हतोत्साहित करते हैं या इसकी जानकारी प्रबंधन को देना अनिवार्य करते हैं.

स्टडी की रैंकिंग यह संकेत देती है कि भारत में कार्यस्थल की सामाजिक संरचना तेजी से बदल रही है. युवा वर्ग की बढ़ती मौजूदगी और लंबे समय तक ऑफिस में रहने की प्रवृत्ति रिश्तों की दिशा तय करने लगी है. हालांकि इसका सामाजिक और पेशेवर असर दोनों दिशाओं में दिखाई देता है. एचआर विशेषज्ञ यह मानते हैं कि कंपनियों को ऐसे मामलों के लिए स्पष्ट नीतियां बनानी होंगी ताकि कार्यस्थल का माहौल संतुलित और सुरक्षित बना रहे.
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