Jharkhand News: सात राज्यों के आठ शहरों में प्रवासी मजदूरों के लिए प्रवासन सहायता केंद्र खोलने की तैयारी शुरू हो गई है. झारखंड के लाखों मजदूर हर साल रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों में जाते हैं. कई बार उन्हें कानूनी, प्रशासनिक या काम से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इसी को देखते हुए श्रम नियोजन प्रशिक्षण और कौशल विकास विभाग ने इन शहरों में सहायता केंद्र खोलने का प्रस्ताव तैयार किया है. बजट में इसके लिए राशि का प्रावधान भी किया जा चुका है. अब यह प्रस्ताव योजना प्राधिकृत समिति के समक्ष भेजा जाएगा.
केंद्रों का उद्देश्य उन मजदूरों को त्वरित सहायता और समन्वय उपलब्ध कराना है जो राज्य से बाहर काम कर रहे हैं. यदि किसी मजदूर को किसी दूसरे राज्य में परेशानी होती है तो यह केंद्र वहां की सरकार या स्थानीय प्रशासन से संपर्क स्थापित कर मदद सुनिश्चित करेगा.
कौन से शहरों में खुलेंगे केंद्र
प्रस्ताव के अनुसार ये केंद्र तमिलनाडु के तिरुपुर और चेन्नई, महाराष्ट्र के पुणे, कर्नाटक के बेंगलुरु, तेलंगाना के हैदराबाद, गुजरात के अहमदाबाद, राजस्थान के नीमराना और दिल्ली में बनाए जाएंगे. यह योजना हेमंत सोरेन की पिछली सरकार के दौरान तत्कालीन श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता के कार्यकाल में तैयार की गई थी. अब इसे जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. केंद्रों का संचालन निजी एजेंसियों के हाथ में होगा और शुरू होने के बाद एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जाएगा.
केंद्रों में उपलब्ध होंगी ये सुविधाएं
इन केंद्रों के माध्यम से संबंधित राज्यों में रोजगार और रहने की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी. पीएफ, ईएसआईसी, बैंक खाता, पहचान पत्र से जुड़ी दिक्कतों का समाधान किया जाएगा. वेतन पर्ची, ओवर टाइम भुगतान जैसी समस्याओं में भी मजदूरों को सहयोग मिलेगा. कार्यस्थल पर पहचान सत्यापन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी और आवश्यक दस्तावेज जैसे नियुक्ति पत्र या नियोक्ता से स्वीकृति पत्र उपलब्ध कराने के लिए नियोक्ताओं से समन्वय स्थापित किया जाएगा.
श्रम नियोजन प्रशिक्षण विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेज दिया है और जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है.
यह कदम प्रवासी मजदूरों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत साबित हो सकता है. बाहरी राज्यों में काम करने वाले मजदूर अक्सर ठगी, दस्तावेजों की समस्या और वेतन विवाद का सामना करते हैं. यदि यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होती है तो मजदूरों को तत्काल सहायता, कानूनी सुरक्षा और प्रशासनिक सहयोग मिल सकेगा. हालांकि, चुनौती यह होगी कि निजी एजेंसियों द्वारा संचालित इन केंद्रों की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित हो. योजना का सफल क्रियान्वयन ही तय करेगा कि यह पहल मजदूरों को वास्तविक सुरक्षा दे पाएगी या सिर्फ कागजों में सीमित रह जाएगी.