धमाके में इस्तेमाल की गई कार उसी के नाम पर रजिस्टर्ड थी. एनआईए ने उसे दिल्ली से पकड़ा
धमाके में इस्तेमाल की गई कार उसी के नाम पर रजिस्टर्ड थी. एनआईए ने उसे दिल्ली से पकड़ा. धमाके की जांच पहले दिल्ली पुलिस कर रही थी, लेकिन बाद में केस एनआईए को सौंपा गया. केस अपने हाथ में लेने के बाद एनआईए ने बड़ी तलाशी अभियान शुरू किया था, और उसी के दौरान आमिर गिरफ्त में आया. जांच में सामने आया कि आमिर जम्मू-कश्मीर के सांबूरा, पंपोर का रहने वाला है. उसने पुलवामा के उमर के साथ मिलकर ये हमला प्लान किया था. आमिर दिल्ली इसलिए आया था ताकि उस कार को खरीदने में मदद कर सके, जिसे बाद में धमाके के लिए आईईडी (बम बनाने वाला उपकरण) के तौर पर इस्तेमाल किया गया.
सुसाइड बॉम्बर की तलाश में था उमर
वहीं आतंकी डॉ. उमर नबी से जुड़े कुछ लोगों को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हिरासत में लिया है. उसने पूछताछ में सामने आया है कि डॉक्टरों वाला ये व्हाइट कॉलर मॉड्यूल पिछले साल ही एक सुसाइड बॉम्बर की तलाश में था. इसका जिम्मा डॉ. उमर पर ही था. वहीं मॉड्यूल के एजेंडे को लगातार आगे बढ़ा रहा था. उमर का मानना था कि मॉड्यूल में एक सुसाइड बॉम्बर का होना जरूरी है. अधिकारियों ने बताया हिरासत में काजीगुंड का जसीर उर्फ दानिश भी है. उसके मुताबिक अक्टूबर 2023 में कुलगाम की एक मस्जिद में उसकी डॉक्टरों वाले इस टेरर मॉड्यूल से मुलाकात हुई थी.
प्लान पर फिर पानी
इसके बाद उसे फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी ले जाया गया, जहां किराए के कमरे में उसे रखा गया. मॉड्यूल चाहता था कि वह ओवर-ग्राउंड वर्कर बने, लेकिन उमर ने उसे कई महीनों तक सुसाइड बॉम्बर बनने के लिए ब्रेनवॉश किया. मॉड्यूल की प्लानिंग इसलिए फेल हुई क्योंकि जसीर ने आर्थिक स्थिति खराब होने और इस्लाम में आत्महत्या हराम होने का हवाला देकर सुसाइड बॉम्बर बनने से इनकार कर दिया था.
कई राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय
एनआईए इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस, जम्मू-कश्मीर पुलिस, हरियाणा पुलिस, यूपी पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर कर रही है. जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश में है कि इस धमाके के पीछे कौन-कौन लोग और संगठन जुड़े हुए थे और उनकी साजिश कितनी बड़ी थी. यह केस नंबर RC-21/2025/NIA/DLI के तहत दर्ज है और जांच अब राज्य से राज्य तक फैल चुकी है.