Jharkhand News: केंद्र सरकार ने वित्तीय प्रवाह की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्र प्रायोजित योजनाओं की राशि अब सीधे भारतीय रिजर्व बैंक में रखने का निर्णय लिया है. इसके साथ ही सभी भुगतान आरबीआई के ई कुबेर प्लेटफॉर्म के जरिये ही किए जाएंगे. वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं और कहा है कि 1 नवंबर 2025 से सभी केंद्रीय प्रायोजित योजनाएं इसी मॉडल पर संचालित होंगी.
नयी व्यवस्था के तहत एसएनए स्पर्श प्रणाली लागू होगी जिसके अंतर्गत प्रत्येक योजना के लिए आरबीआई में अलग निकासी खाता खोला जाएगा. राज्य सरकार बिल तैयार करेगी और भुगतान की कार्रवाई ई कुबेर के जरिये होगी. केंद्रांश और राज्यांश दोनों की राशि इसी खाते से निर्गत होगी. इसका अर्थ यह है कि योजनाओं का पैसा अब राज्य के बैंकों में जमा नहीं होगा और सीधे लाभुकों के खातों में रियलटाइम आधार पर ट्रांसफर किया जाएगा.
इस नयी प्रणाली से मनरेगा, पोषण अभियान, पीएम आवास ग्रामीण और शहरी, एनआरएलएम तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी अनेक योजनाओं पर सीधा प्रभाव पड़ेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे राज्य के बैंकों में सरकारी योजनाओं के अंतर्गत जमा हो रही फ्लोट डिपॉजिट में भारी कमी आएगी. ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित शाखाओं की तरलता पर भी दबाव पड़ सकता है. जमा राशि घटने से ऋण वितरण की क्षमता प्रभावित होने की आशंका है.
रांची में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में वित्त सचिव की अध्यक्षता में झारखंड में एसएनए स्पर्श के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा की गई. बैठक में सभी विभागों को सख्त निर्देश दिए गए कि सभी सीएसएस और एसएलएस योजनाओं को तुरंत स्पर्श प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड किया जाए. भुगतान केवल आरबीआई ई कुबेर के जरिये ही किए जाएंगे. अप्रयुक्त राशि को जल्द केंद्र को लौटाने और डीबीटी आधारित भुगतान को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया.
वित्त सचिव ने चेतावनी दी कि फंड उपयोग में किसी भी देरी या प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यह भी तय किया गया कि वर्ष 2025 के अंत तक राज्य की सभी योजनाएं सौ प्रतिशत स्पर्श प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित होंगी. इसके बाद फंड उपयोग और प्रवाह की चौबीस घंटे रियलटाइम मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी.
नई प्रणाली से बैंकों को नुकसान की आशंका जताई जा रही है क्योंकि जमा राशि में गिरावट आएगी. विभागीय लेनदेन को आकर्षित करने के लिए बैंक प्रतिनिधियों द्वारा दिए जाने वाले प्रलोभन भी समाप्त होंगे जिससे कमीशन आधारित अनौपचारिक प्रथाओं में कमी आएगी.
केंद्र ने फंड फ्लो को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाने के उद्देश्य से यह परिवर्तन किया है. हालांकि पारदर्शिता और रियलटाइम भुगतान की दिशा में यह कदम सकारात्मक है, लेकिन राज्य के बैंकिंग ढांचे पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है. फ्लोट डिपॉजिट में कमी से बैंकों की वित्तीय स्थिरता और ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण उपलब्धता प्रभावित हो सकती है. दूसरी ओर, अनियमितता और मध्यस्थता को रोकने की दिशा में यह व्यवस्था अधिक सख्त और जवाबदेह साबित हो सकती है. ऐसे में राज्य सरकार और बैंकों दोनों के लिए जरूरी होगा कि वे इस नये परिदृश्य के लिए अपनी रणनीति समय रहते तैयार करें ताकि विकास योजनाओं और वित्तीय प्रणाली के संचालन में कोई बाधा न आए.