मेजर शैतान सिंह (परमवीर चक्र) के शौर्य को नमनl18,000 फीट की ऊंचाई पर
मेजर शैतान सिंह (परमवीर चक्र) के शौर्य को नमनl18,000 फीट की ऊंचाई पर माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान में लड़ी गई इस बर्फीली जंग में कुमाऊं रेजीमेंट की 13वीं बटालियन की चार्ली कंपनी ने अतुलनीय वीरता का प्रदर्शन किया। मेजर शैतान सिंह (परमवीर चक्र विजेता) के नेतृत्व में 123 जवानों की इस कंपनी, जिसमें अधिकतर हरियाणा के रेवाड़ी क्षेत्र के अहीर (यादव) समुदाय के जवान शामिल थे।
अक्टूबर 1962 में लद्दाख से लेकर नेफा
ने चुशुल की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाई।जब अक्टूबर 1962 में लद्दाख से लेकर नेफा (अरुणाचल प्रदेश) तक भारतीय सेना को पीछे हटना पड़ा था, तब रेज़ांग ला में भारतीय जवानों ने चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को करारा जवाब दिया। युद्धवीर
मानिक वर्धा अतुलनीय वीरता और बलिदान
"अंतिम सैनिक, अंतिम गोली" की उक्ति को चरितार्थ करते हुए 13 कुमाऊं रेजीमेंट की चार्ली कंपनी के केवल 3 जूनियर कमीशंड ऑफिसर और 120 जवानों ने 1,300 से अधिक चीनी सैनिकों को मार गिराया। इस युद्ध में 114 वीर जवान मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहीद हो गए।
असाधारण वीरता के लिए एक परमवीर चक्र
इस युद्ध में असाधारण वीरता के लिए एक परमवीर चक्र, आठ वीर चक्र और अनेक अन्य सैन्य सम्मान प्रदान किए गए।
वक्ताओं के विचार अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद सदस्य मनोज कुमार सिंह ने कहा, "रेजांगला युद्ध भारतीय सैनिकों की अदम्य साहस और बलिदान की अमर गाथा है। हमें गर्व है कि हमारे जवान दुनिया के सर्वश्रेष्ठ योद्धा थे।"रेजांगला युद्ध की विस्तृत चर्चा करते हुए शहीदों के अदम्य साहस और समर्पण को याद किया।
अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के संतोष कुमार
अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के संतोष कुमार सिंह ने शहीदों को नमन करते हुए कहा, "रेजांगला के वीर जवानों की शौर्यगाथा देश के स्कूली बच्चों को अवश्य बताई जानी चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां इन शहीदों के बलिदान से प्रेरणा ले सकें।" मानिक वर्धा वरुण कुमार मनोज कुमार सिंह धीरज सिंह दया भूषण कृष्ण मोहन सिंह एसके सिंह परमहंस यादव मनजीत सिंह निरंजन शर्मा नवेंदु गवली कुंदन सिंह संतोष सिंह योगेश कुमार सिंह बिरजू कुमारl