Jharkhand News: झारखंड में मनरेगा के हजारों कर्मियों के लिए अच्छी खबर आने वाली है. 3 दिसंबर को राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद की अहम बैठक होने जा रही है जिसमें कर्मियों की सेवा आयु 65 साल करने का प्रस्ताव रखा जाएगा. ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह खुद इस बैठक की अध्यक्षता अध्यक्षता करेंगी और कई बड़े फैसले ले सकती हैं.
सूत्रों के मुताबिक बैठक में सबसे अहम मुद्दा मनरेगा के पुराने कर्मियों को 65 साल तक सेवा देने का रहेगा. अभी ज्यादातर कर्मी साठ साल में रिटायर हो जाते हैं लेकिन अब उन्हें 5 साल और नौकरी मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा आउटसोर्सिंग पर रखे सैकड़ों कर्मियों को सीधे संविदा पर लेने का प्रस्ताव भी रखा गया है जिससे उनकी नौकरी पक्की हो जाएगी.
बैठक में जेएसएलपीएस की तर्ज पर मनरेगा कर्मियों को भी सामाजिक सुरक्षा देने की योजना पर मुहर लग सकती है. बीपीओ की नियुक्ति के पुराने नियम को भी ढीला करने की तैयारी है. अभी 20 पंचायत पर एक बीपीओ रखने का नियम है लेकिन अब क्षेत्र के हिसाब से इसमें छूट दी जा सकती है ताकि दूर दराज के इलाकों में भी कर्मी आसानी से मिल सकें.
इसके अलावा मनरेगा आयुक्त का पद खाली होने पर प्रभारी नियुक्ति और लोकपाल की नियुक्ति जैसे प्रशासनिक फैसले भी होने हैं. पिछले फैसलों पर अमल की समीक्षा के साथ पूरे राज्य में मनरेगा की भौतिक और वित्तीय प्रगति की रिपोर्ट भी पेश की जाएगी.
परिषद ने सभी विभागों को पत्र भेजकर पूरी तैयारी के साथ आने को कहा है. मंत्री की इजाजत से कोई नया मुद्दा भी बैठक में जोड़ा जा सकता है.
यह बैठक झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग के लिए बेहद अहम है क्योंकि मनरेगा राज्य की सबसे बड़ी रोजगार योजना है और इसमें काम करने वाले हजारों कर्मी सालों से स्थायी नौकरी और बेहतर सुविधाओं की मांग कर रहे थे. सेवा आयु 65 साल करने से अनुभवी कर्मियों का फायदा योजना को मिलेगा वहीं आउटसोर्सिंग कर्मियों को संविदा में लाने से उनकी नौकरी का डर खत्म होगा. अगर ये प्रस्ताव पास हो गए तो ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा और योजना का क्रियान्वयन और तेज होगा. राजनीतिक नजरिए से भी हेमंत सरकार इसे अपनी बड़ी उपलब्धि दिखा सकती है, ग्रामीण वोटरों को साधने का यह सीधा रास्ता है. 3 दिसंबर का फैसला तय करेगा कि ये सिर्फ प्रस्ताव रहते हैं या हकीकत बनते हैं.