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  • 2025-11-21

Jharkhand News: झारखंड में उद्योग लगाना हुआ आसान, तीन साल तक लाइसेंस निरीक्षण से छूट, हेमंत सरकार ने लागू किया नया MSME अधिनियम

Jharkhand News: झारखंड में अब कोई भी व्यक्ति बिना एक भी लाइसेंस लिए तुरंत अपना छोटा मध्यम उद्योग शुरू कर सकेगा. हेमंत सरकार ने झारखंड सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विशेष छूट अधिनियम 2025 को लागू कर दिया. राज्यपाल की मंजूरी के बाद जारी अधिसूचना में साफ कहा गया है कि नए MSME को पहले तीन साल तक व्यापार लाइसेंस दुकान स्थापना पंजीकरण और ज्यादातर विभागों के निरीक्षण से पूरी छूट मिलेगी.

बस एक काम करना होगा. उद्यमी को ऑनलाइन पोर्टल या रांची के नेपाल हाउस सिंगल विंडो सेंटर में आशय की घोषणा जमा करनी होगी. कोई फीस नहीं लगेगी. घोषणा जमा करते ही कंप्यूटर से अभिवीकृत प्रमाण पत्र तुरंत जारी हो जाएगा. यही कागज तीन साल तक हर लाइसेंस की जगह माना जाएगा. तीन साल बाद छह महीने के अंदर सारे लाइसेंस लेने होंगे.

सबसे बड़ी राहत यह है कि तीन साल तक कोई अफसर बिना इजाजत उद्योग में घुसकर निरीक्षण नहीं कर सकेगा. निरीक्षण सिर्फ तीन हालात में हो सकता है. जान को खतरा हो पर्यावरण को नुकसान हो या सुरक्षा की गंभीर शिकायत हो. इजाजत डीएम या MSME निदेशक ही दे सकेंगे. राज्य सरकार बाद में अधिसूचना से और विभाग जोड़ सकेगी.

नोडल एजेंसी राज्य स्तर पर MSME निदेशालय और जिला स्तर पर जिला MSME केंद्र होंगे. गलत जानकारी देने या नियम तोड़ने पर प्रमाण पत्र रद्द हो सकता है लेकिन पहले नोटिस और सफाई का मौका मिलेगा.

सरकार का दावा है कि इससे निवेश बढ़ेगा कागजी झंझट खत्म होगा और स्थानीय स्तर पर हजारों नौकरियां पैदा होंगी. झारखंड अब उन राज्यों की फेहरिस्त में शामिल हो गया जहां स्टार्टअप और छोटे उद्योग लगाना सबसे आसान है.

हेमंत सरकार का यह कदम झारखंड को निवेश के नक्शे पर लाने का सबसे बड़ा दांव है. तीन साल की पूरी छूट देकर अफसरशाही के डर को खत्म करने की कोशिश की गई है जो छोटे उद्यमियों की सबसे बड़ी रुकावट थी. सिंगल पेज घोषणा और तुरंत प्रमाण पत्र का प्रावधान बिहार उत्तर प्रदेश से भी आगे का मॉडल है. अगर जिला स्तर पर MSME केंद्रों को मजबूत कर दिया जाए तो अगले दो साल में हजारों यूनिट्स खुल सकती हैं. लेकिन तीन साल बाद लाइसेंस लेने की अनिवार्यता और निरीक्षण की छूट खत्म होने पर अफसर फिर पुराना खेल शुरू न करें यह सबसे बड़ी चुनौती होगी. कुल मिलाकर यह अधिनियम झारखंड को छोटे उद्योगों का हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है.
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