Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2025-11-25

Jharkhand News: लातेहार में 2000 एकड़ में जीराफूल धान की खेती, राष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी

Jharkhand News: लातेहार में इस वर्ष लगभग 2000 एकड़ भूमि पर जीराफूल धान की खेती करवायी गयी है. फसल पूरी तरह तैयार हो चुकी है और कई जगह कटाई भी शुरू हो गई है. जिला प्रशासन का मानना है कि यदि उत्पादन अनुकूल रहा तो किसानों की आमदनी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. साथ ही GI टैग दिलाने की पहल के बाद यह धान राष्ट्रीय स्तर पर लातेहार की पहचान भी बनेगा.

जिले में अब तक किसान मुख्य रूप से पारंपरिक धान की ही खेती करते रहे थे, जिससे मुनाफा सीमित रहता था. इस बार महुआडांड़ प्रखंड में एफपीओ के माध्यम से किसानों को जागरूक कर बड़े पैमाने पर जीराफूल धान की बुआई करवाई गई. पहली बार इतनी विस्तृत खेती होने से किसानों में उत्साह है. अनुमान है कि प्रति एकड़ लगभग 7 से 8 क्विंटल उपज मिल सकती है.

जीराफूल धान अपने अत्यधिक सुगंधित और स्वादिष्ट होने के कारण महंगा चावल माना जाता है. खुले बाजार में इसकी कीमत लगभग 200 रुपये प्रति किलोग्राम रहती है. किसानों का कहना है कि इसकी सुगंध केवल चावल में ही नहीं, पौधों और पुआल में भी रहती है. इतना ही नहीं, इसे खाने से गाय का दूध तक सुगंधित हो जाता है. यह धान बारिश की शुरुआत में लगाया जाता है और नवंबर के अंतिम सप्ताह से दिसंबर तक इसकी कटाई होती है.

छत्तीसगढ़ के बाद अब झारखंड का लातेहार जिला जीराफूल धान का नया केंद्र बनकर उभर रहा है. उत्पादन के बाद लातेहार के नाम से विशेष ब्रांडिंग कर इसे बाजार में उतारा जाएगा. लातेहार डीसी उत्कर्ष गुप्ता ने बताया कि प्रशासन आने वाले समय में जीराफूल धान के लिए जीआई टैग की प्रक्रिया शुरू करेगा. अगले वर्ष इसे जिले के अन्य प्रखंडों में भी विस्तार देने की तैयारी है.

किसानों की सुविधा के लिए महुआडांड़ में डीएमएफटी मद से प्रोसेसिंग प्लांट भी स्थापित किया जा रहा है. प्रशासन का प्रयास है कि किसानों को प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच में किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो.

जीराफूल धान पर लातेहार प्रशासन का यह बड़ा प्रयोग एक कृषि आधारित आर्थिक मॉडल तैयार कर सकता है. सुगंधित और महंगी किस्म होने के कारण इसका बाजार पहले से मजबूत है. यदि जीआई टैग मिल गया तो यह धान झारखंड की पहचान बनकर किसानों की आय दोगुनी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !