Jharkhand News: झारखंड हाई कोर्ट ने बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल होटवार में कैदियों को परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता की जांच करने का निर्देश दिया है. एक क्रिमिनल अपील की सुनवाई के दौरान अदालत के 18 नवंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में जेल अधीक्षक सुदर्शन मुरमू और जेलर लौकुश कुमार कोर्ट में उपस्थित हुए और भोजन की आपूर्ति से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की.
जेलर ने बताया कि अब भोजन जेल मैनुअल के अनुरूप दिया जा रहा है. मामले की सुनवाई हाई कोर्ट की खंडपीठ कर रही है जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद कर रहे हैं. कोर्ट को जानकारी दी गई कि गृह सचिव और आईजी जेल ने राज्य के सभी जेलों से भोजन की गुणवत्ता पर रिपोर्ट का शपथ पत्र दाखिल किया है. सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि भोजन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और कैदियों को मैनुअल के अनुसार खाना उपलब्ध कराया जा रहा है.
कोर्ट ने जेल में कैदियों की सुविधा के लिए कैंटीन संचालित करने की अनुमति दी है. साथ ही यह स्पष्ट किया कि भोजन की गुणवत्ता में किसी तरह की कमी पाए जाने पर जेलर जिम्मेदार होंगे. हाई कोर्ट ने झालसा और डालसा को जेल निरीक्षण का निर्देश दिया है. इसके तहत रांची डालसा के चेयरमैन और सेक्रेटरी को अचानक निरीक्षण कर रिपोर्ट देने को कहा गया है. राज्य के सभी डालसा चेयरमैन और सेक्रेटरी को दो सप्ताह के भीतर भोजन की गुणवत्ता की जांच कर रिपोर्ट पेश करनी होगी.
अदालत ने सस्पेंड चल रहे पूर्व जेलर दिवानाथ राम के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की स्थिति भी बताने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर को निर्धारित है. कोर्ट ने झालसा के सदस्य सचिव को निर्देश दिया है कि आदेश की प्रति सभी डालसा चेयरमैन को भेजी जाए और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई के लिए उन्हें सूचित किया जाए.
यह आदेश दर्शाता है कि जेलों में बुनियादी सुविधाओं और भोजन की गुणवत्ता को लेकर अदालत गंभीर है. हाई कोर्ट ने न सिर्फ वर्तमान व्यवस्था की जांच सुनिश्चित की है बल्कि अचानक निरीक्षण जैसे कदमों से पारदर्शिता भी बढ़ाई है. जेल प्रशासन की जवाबदेही तय करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि कैदियों के साथ न्यूनतम मानवीय मानकों से समझौता स्वीकार नहीं होगा. यह मामला राज्य की जेल प्रणाली में व्यवस्थागत सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.