अवैध पार्किंग और अतिक्रमण पर जताई नाराज़गी
सरयू राय ने पत्र में लिखा कि जब वह मैदान में चल रहे सौंदर्यीकरण कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे, तो देखा कि पूरा क्षेत्र अवैध पार्किंग में तब्दील है। कई जगह वाहन मरम्मत के अस्थायी गैरेज बनाए गए हैं। इसके अलावा, घुमंतू परिवारों ने प्लास्टिक के झोपड़ों के रूप में स्थायी कब्जा जमा रखा है। मैदान के अंदर अस्थायी दुकानें भी खुली हैं। एक हिस्से में कश्मीरी उलैन मेला लगा हुआ है, जिससे मैदान का स्वरूप बिगड़ गया है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह मैदान अब “अवैध गतिविधियों का अड्डा” बन चुका है, जो इसकी ऐतिहासिक पहचान के विपरीत है।
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की स्मृति से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान
पत्र में सरयू राय ने बताया कि 2014-2019 में विधायक रहने के दौरान जुस्को ने मैदान की घेराबंदी व सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू किया था, लेकिन यह अधूरा रह गया। स्थानीय संगठनों की मांग पर मैदान का नाम नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आमबगान मैदान रखा गया था।
उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक दिवंगत मृगेन्द्र प्रताप सिंह की विधायक निधि से यहां नेताजी की प्रतिमा स्थापित की गई, और उनकी अनुशंसा पर प्रतिमा स्थल पर छतरी और घेराबंदी का काम हुआ। प्रतिमा स्थल के पास लगाई गई पट्टिका पर उन्होंने नेताजी के महान पलायन और स्वतंत्रता अभियान का पूरा रूट चार्ट भी अंकित कराया है, जिससे यह स्थान एक ऐतिहासिक स्मारक की तरह विकसित हो सके।
मैदान को स्मृति स्थल के रूप में विकसित करने का आग्रह
सरयू राय ने कहा कि नेताजी की स्मृतियों से जुड़े इस मैदान को सुरम्य स्मृति स्थल के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने आग्रह किया कि जिला प्रशासन, जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति और टाटा स्टील लिमिटेड मिलकर मैदान की घेराबंदी, सौंदर्यीकरण और संरक्षण की व्यापक योजना तैयार करें।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यह ऐतिहासिक स्थल जल्द ही अपनी गरिमा वापस पाएगा।
स्थलीय निरीक्षण के दौरान उनके साथ कई सामाजिक कार्यकर्ता, स्थानीय प्रतिनिधि और नागरिक मौजूद थे।