लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा
इस आंदोलन को लेकर समिति के सक्रिय सदस्य रामबाबू तिवारी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल की नहीं है, बल्कि पूरे जमशेदपुर शहर और यहां रहने वाले लाखों नागरिकों के जीवन से जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने कहा कि टाटा कंपनी के कारण शहर में लगातार प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है, जिसका सीधा असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
आए दिन लोगों की जान जा रही
रामबाबू तिवारी ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शहर में कैंसर जैसी घातक बीमारियां तेजी से फैल रही हैं, जिसका मुख्य कारण प्रदूषित हवा, धूल और औद्योगिक अपशिष्ट है। इसके साथ ही भारी वाहनों की बेलगाम आवाजाही और अव्यवस्थित ट्रैफिक व्यवस्था के चलते सड़क दुर्घटनाएं रोजमर्रा की घटना बन चुकी हैं, जिनमें आए दिन लोगों की जान जा रही है।
पर्यावरणीय जिम्मेदारियों से बच रही है
उन्होंने आरोप लगाया कि इन गंभीर समस्याओं के बावजूद राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर चुप्पी साधी गई है, जिससे हालात दिन-ब-दिन और भयावह होते जा रहे हैं। रामबाबू तिवारी ने कहा कि टाटा स्टील एक जिम्मेदार औद्योगिक संस्था होने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कंपनी अपनी सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों से बच रही है।
अधिक उग्र आंदोलन किया जाएगा
समिति ने स्पष्ट किया है कि 14 दिसंबर को होने वाला घेराव शांतिपूर्ण होगा, लेकिन अगर इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और प्रदूषण व सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में इससे भी अधिक उग्र आंदोलन किया जाएगा।