जमशेदपुर: टाटा स्टील को भारत में खेलों के प्रचार और विकास के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता तथा उत्कृष्ट योगदान के लिए दो प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि भारतीय खेलों में टाटा स्टील की स्थायी और सशक्त विरासत को और मजबूत करती है।
कंपनी को भुवनेश्वर में आयोजित स्पोर्ट्स साइंस इंडिया अवॉर्ड्स 2025 तथा नई दिल्ली में आयोजित तीसरे सीआईआई स्पोर्ट्स बिजनेस अवॉर्ड्स 2025 में सम्मान प्राप्त हुआ। ये पुरस्कार खेलों के प्रति टाटा स्टील के गहन दार्शनिक दृष्टिकोण और व्यापक खेल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में उसके दीर्घकालिक योगदान को मान्यता देते हैं।
6 दिसंबर 2025 को भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में आयोजित स्पोर्ट्स साइंस इंडिया अवॉर्ड्स 2025 समारोह में टाटा स्टील को भारत में खेलों के विकास हेतु प्रतिष्ठित एसएसआई स्पोर्ट्स डेवलपमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मनोज आहूजा (आईएएस), सचिन आर. जाधव (आईएएस, खेल सचिव), अमिताभ ठाकुर (आईपीएस, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी) और दिलीप तिर्की (पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान) सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। टाटा स्टील की ओर से यह पुरस्कार मुकुल विनायक चौधरी, चीफ स्पोर्ट्स, टाटा स्टील तथा सीईओ एवं एमडी, जमशेदपुर एफसी ने ग्रहण किया।
यह सम्मान टाटा स्टील के उन अग्रणी प्रयासों को रेखांकित करता है, जिनकी जड़ें संस्थापक जमशेदजी टाटा की दूरदर्शिता में निहित हैं। उन्होंने जमशेदपुर में खेलों के लिए बड़े क्षेत्रों को आरक्षित करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। यही दर्शन आगे चलकर एक मजबूत खेल पारिस्थितिकी तंत्र में विकसित हुआ, जिसमें जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स जैसी विश्वस्तरीय अवसंरचना और टाटा फुटबॉल अकादमी तथा टाटा आर्चरी अकादमी जैसी प्रशिक्षण संस्थाएं शामिल हैं, जिन्होंने लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाओं को विकसित किया है।
खेल संरक्षण में अपने नेतृत्व को और सुदृढ़ करते हुए, टाटा स्टील को 9 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली स्थित द ग्रैंड होटल में आयोजित तीसरे सीआईआई स्पोर्ट्स बिजनेस अवॉर्ड्स 2025 में खेल संरक्षण में उत्कृष्टता की विरासत पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार भी मुकुल विनायक चौधरी ने ग्रहण किया। अपने संबोधन में उन्होंने टाटा स्टील के खेलों से गहरे संबंधों को जमशेदजी टाटा की दूरदर्शिता से जोड़ा। उन्होंने उल्लेख किया कि 1919 में सर दोराबजी टाटा भारतीय ओलंपिक संघ के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे और 1920 में एंटवर्प ओलंपिक में भारत की पहली ओलंपिक टीम का व्यक्तिगत रूप से वित्त पोषण और नेतृत्व किया था, जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय खेल यात्रा की नींव पड़ी।
खेलों के प्रति यह ऐतिहासिक प्रतिबद्धता, बुनियादी ढांचे, अकादमियों और जमीनी स्तर के कार्यक्रमों में निरंतर निवेश के साथ मिलकर, टाटा स्टील के एथलीटों और प्रशिक्षकों को अनेक राष्ट्रीय सम्मानों तक ले गई है, जिनमें 42 अर्जुन पुरस्कार और 6 द्रोणाचार्य पुरस्कार शामिल हैं। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के खेल विभाग ने मुकुल विनायक चौधरी को उनके दूरदर्शी नेतृत्व और भारतीय खेलों पर उनके परिवर्तनकारी प्रभाव के लिए बधाई दी। इस अवसर पर खेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के नेता और 150 से अधिक विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।
मुकुल विनायक चौधरी ने कहा,
“ये पुरस्कार खेलों की उस शक्ति में टाटा स्टील के अटूट विश्वास को दर्शाते हैं, जो चरित्र निर्माण, नेतृत्व विकास और राष्ट्रीय प्रगति में सहायक है। हमारे संस्थापक की दूरदर्शिता से लेकर अकादमियों और जमीनी स्तर के कार्यक्रमों में निरंतर निवेश तक, हमें अपनी इस यात्रा पर गर्व है। हम एक समग्र खेल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण और जमीनी स्तर से वैश्विक मंच तक प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
टाटा स्टील का खेलों को बढ़ावा देने का एक दीर्घ इतिहास रहा है। कंपनी ने फुटबॉल के लिए टाटा फुटबॉल अकादमी, तीरंदाजी के लिए टाटा आर्चरी अकादमी जैसी विश्वस्तरीय संस्थाओं की स्थापना की है, साथ ही जमशेदपुर एफसी, टाटा किड्स ऑफ स्टील ट्रायथलॉन और टाटा स्टील चेस टूर्नामेंट जैसी विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं और पहलों का समर्थन किया है। ये सम्मान भारतीय खेल परिदृश्य पर टाटा स्टील के सतत और प्रभावशाली योगदान को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।