स्थिति यह है कि राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों में पिछले छह वर्षों से छात्र संघ और शिक्षक संघ के चुनाव नहीं हुए हैं। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों की समस्याएं सीनेट जैसी महत्वपूर्ण संस्था तक नहीं पहुंच पा रही हैं। वहीं विश्वविद्यालयों में सीनेट की बैठकें भी नियमित रूप से नहीं हो रही हैं। अधिकांश विश्वविद्यालयों में चार वर्ष से अधिक समय से सीनेट की बैठक नहीं बुलाई गई है।
राज्य के कई विश्वविद्यालयों में नियमित कुलपति और प्रतिकुलपति के पद भी खाली हैं। रांची विश्वविद्यालय, महिला विश्वविद्यालय, चाईबासा विश्वविद्यालय और डीएसपीएमयू में लगभग पांच माह से नियमित कुलपति नहीं हैं। वहीं रांची विश्वविद्यालय, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, कोल्हान विश्वविद्यालय, विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय और नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में प्रतिकुलपति का पद रिक्त है।
अंगीभूत और मॉडल कॉलेजों में नियमित प्राचार्यों के लगभग 90 प्रतिशत पद खाली
इतना ही नहीं, कई विश्वविद्यालयों में रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक, वित्त पदाधिकारी, डिप्टी रजिस्ट्रार और सहायक रजिस्ट्रार जैसे गैर-शैक्षणिक पद भी प्रभार के भरोसे चल रहे हैं। अंगीभूत और मॉडल कॉलेजों में नियमित प्राचार्यों के लगभग 90 प्रतिशत पद खाली हैं।
आरोपों के बाद सरकार स्तर पर इस पर रोक लगा दी
विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में नियमित शिक्षकों की भारी कमी है, जिससे पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। राज्य में सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के करीब साढ़े तीन हजार पद रिक्त हैं। हाल ही में जेपीएससी के माध्यम से सहायक प्रोफेसरों को प्रोन्नति दी गई है और अब एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन सीधी नियुक्ति अब तक नहीं हो सकी है। शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन गड़बड़ी के आरोपों के बाद सरकार स्तर पर इस पर रोक लगा दी गई।
10 प्रबुद्ध व्यक्तियों का मनोनयन अनिवार्य
नियमानुसार विश्वविद्यालय का बजट सीनेट से स्वीकृत होकर राज्य सरकार को भेजा जाना चाहिए, लेकिन सीनेट की बैठक नहीं होने के कारण विश्वविद्यालय अनुमान के आधार पर बजट तैयार कर सरकार को भेज रहे हैं। नियमों के अनुसार सीनेट की बैठक वर्ष में कम से कम दो बार होनी चाहिए। साथ ही सिंडिकेट और सीनेट में कम से कम छह विधायक और समाज के कम से कम 10 प्रबुद्ध व्यक्तियों का मनोनयन अनिवार्य है, जो अब तक नहीं हो सका है।