स्थानीय स्तर पर निर्णय
कैबिनेट बैठक के बाद आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में पंचायती राज सचिव मनोज कुमार ने बताया कि पेसा रूल के अंतर्गत रांची सहित राज्य के कुल 15 जिले आएंगे। इनमें से 13 जिले पूरी तरह अनुसूचित क्षेत्र में हैं, जबकि शेष दो जिलों के कुछ प्रखंड अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। उन्होंने कहा कि इस नियम के लागू होने से ग्रामसभा को कई अहम क्षेत्रों में अधिकार और जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर निर्णय प्रक्रिया को बल मिलेगा।
रेवेन्यू गांवों की संरचना एक समान
मनोज कुमार ने जानकारी दी कि पेसा रूल के तहत खनन, भू-अधिग्रहण और विकास योजनाओं में ग्रामसभा की भूमिका तय की गई है। इसके साथ ही जल संसाधनों के प्रबंधन, लघु वन उपज पर नियंत्रण, तथा गांवों के स्वास्थ्य केंद्र और स्कूलों के संचालन में भी ग्रामसभा की अहम भूमिका होगी। इससे ग्रामसभाएं और अधिक सशक्त होंगी और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप फैसले लिए जा सकेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी रेवेन्यू गांवों की संरचना एक समान रहेगी।
कट-ऑफ तिथि मानी जाएगी
कैबिनेट बैठक में शिक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए। अब झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित मैट्रिक और इंटरमीडिएट स्तरीय परीक्षाएं दो चरणों में आयोजित की जाएंगी। पहले यह परीक्षा एक ही चरण में होती थी। नए नियम के तहत यदि मुख्य परीक्षा में 50 हजार से कम आवेदन होंगे तो प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) नहीं ली जाएगी। वहीं, सरकारी सेवाओं के राजपत्रित और अराजपत्रित पदों पर सीधी नियुक्ति के लिए आयु सीमा तय करते हुए यह निर्धारित किया गया है कि अगले पांच वर्षों की भर्तियों के लिए 31 दिसंबर 2030 को आयु सीमा की कट-ऑफ तिथि मानी जाएगी।
स्वशासन की व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके
कैबिनेट के फैसलों के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार जनता की भावनाओं और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले रही है। पेसा कानून पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कैबिनेट में आने वाले हर जनहित के मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाता है और पेसा कानून भी उसी का हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस कानून को अधिक प्रभावी और उपयोगी बनाने के लिए विभिन्न विभागों से विस्तृत मंतव्य लिए गए, ताकि ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में स्वशासन की व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।
महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम
इस अवसर पर मंत्री दीपिका पांडे, विधायक राजेश कछप सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के बयान भी सामने आए, जिन्होंने पेसा रूल को झारखंड के जनजातीय समाज के लिए एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम बताया।