Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट के जज सुजीत नारायण प्रसाद ने शुक्रवार को हजारीबाग में न्यायिक और सुधारात्मक संस्थानों का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने संप्रेक्षण गृह और लोक नायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं और कैदियों को दी जा रही सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया.
संप्रेक्षण गृह का विस्तृत निरीक्षण
निरीक्षण के समय उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह और पुलिस अधीक्षक अंजनी अंजन समेत झालसा से जुड़े अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे. सभी अधिकारियों के साथ न्यायाधीश ने संस्थानों के अलग-अलग हिस्सों का अवलोकन किया. हजारीबाग स्थित संप्रेक्षण गृह में न्यायाधीश ने पूरे परिसर का निरीक्षण किया. उन्होंने वहां रह रहे सजायाफ्ता किशोरों से बातचीत की और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली.
भोजन और स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा
निरीक्षण के दौरान किशोरों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता, किशोर न्याय बोर्ड से संबंधित व्यवस्थाएं, पुस्तकालय, चिकित्सा कक्ष और परामर्श कक्ष की स्थिति की जांच की गई. साथ ही भोजनालय, हॉस्टल, शौचालय, बिजली आपूर्ति और सुरक्षा व्यवस्था का भी गहन निरीक्षण किया गया.
अधिकारियों को दिए गए निर्देश
माननीय न्यायाधीश के स्वागत में संप्रेक्षण गृह के किशोर कैदियों ने योग और व्यायाम की प्रस्तुति दी. इस पहल की सराहना करते हुए न्यायाधीश ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया और उनके सकारात्मक प्रयासों की प्रशंसा की. निरीक्षण के दौरान न्यायाधीश ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए. उन्होंने व्यवस्थाओं में सुधार और बच्चों के हितों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया.
कैदियों से संवाद और कानूनी जानकारी पर जोर
संप्रेक्षण गृह के बाद जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने लोक नायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा का निरीक्षण किया. उन्होंने पूरे परिसर का भ्रमण कर कैदियों को दी जा रही बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान न्यायाधीश ने कैदियों से बातचीत की और कहा कि प्रत्येक कैदी को अपने खिलाफ चल रहे मुकदमों की जानकारी अवश्य होनी चाहिए. उन्होंने महिला वार्ड और अस्पताल वार्ड सहित अन्य विभागों का भी निरीक्षण किया. निरीक्षण के अंत में न्यायाधीश ने कारा प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए. उन्होंने व्यवस्था को और बेहतर बनाने तथा कैदियों के अधिकारों का ध्यान रखने की बात कही.
व्यवस्थाओं में सुधार की संभावना
हाईकोर्ट जज का यह निरीक्षण सुधार गृह और कारा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ऐसे निरीक्षण से न केवल व्यवस्थाओं में सुधार की संभावना बढ़ती है, बल्कि कैदियों और किशोरों के अधिकारों को लेकर प्रशासन की जवाबदेही भी तय होती है. न्यायिक निगरानी से सुधारात्मक संस्थानों में पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण को बल मिलता है.