Jamshedpur Accident News: जमशेदपुर में देर रात हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे ने शहर की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सोनारी इलाके में दो बाइकों की जोरदार टक्कर में एक युवक की मौके पर ही जान चली गई, जबकि पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई. हादसे के बाद घायल युवक सड़क पर तड़पता रहा, लेकिन मदद के लिए कोई आगे नहीं आया.
अंशु ठाकुर की हुई मौत
यह हादसा बीती रात करीब साढ़े 12 बजे सोनारी थाना क्षेत्र के आशियाना गार्डन के पास हुआ. सड़क पर तेज रफ्तार में आ रही दो बाइकें आपस में टकरा गईं. टक्कर इतनी जोरदार थी कि एक बाइक सवार ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. हादसे में जान गंवाने वाले युवक की पहचान अंशु ठाकुर के रूप में हुई है. अंशु जोमैटो में डिलीवरी बॉय के तौर पर काम करता था और जाहिर कॉलोनी का रहने वाला था. हादसे के वक्त वह डिलीवरी के लिए निकला था.
संवेदनहीनता की तस्वीर, सड़क पर तड़पता रहा युवक, लोग वीडियो बनाते रहे
परिजनों का आरोप है कि दूसरी बाइक सोनारी इलाके के रहने वाले युवक द्वारा चलाई जा रही थी. बताया जा रहा है कि टक्कर मारने वाला युवक सरदार अखाड़ा क्षेत्र का रहने वाला है. बाइक के मालिक का नाम लक्ष्मी दास बताया गया है, जबकि घटना के समय बाइक उसका दोस्त गौतम चला रहा था. यह पूरी घटना घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है. फुटेज में साफ दिखाई देता है कि टक्कर के बाद अंशु सड़क पर गिरकर तड़प रहा था. आसपास लोग मौजूद थे, लेकिन कोई भी उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाने की कोशिश करता नजर नहीं आया.
परिजनों का कहना है कि हादसे के बाद कई लोग वहां खड़े होकर वीडियो बनाते रहे, लेकिन किसी ने भी घायल युवक की मदद नहीं की. समय पर सहायता मिलती तो शायद उसकी जान बच सकती थी. इस रवैये ने शहर की सामाजिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पुलिस की कार्रवाई
फिलहाल सोनारी थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है. सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हादसे की परिस्थितियों को खंगाला जा रहा है और बाइक चला रहे युवक की भूमिका की जांच की जा रही है.
इंसानियत धीरे-धीरे संवेदनहीनता में बदलती जा रही
यह हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि समाज के बदलते व्यवहार की भयावह तस्वीर भी है. सड़क पर तड़पते युवक को देखकर मदद के बजाय वीडियो बनाना बताता है कि इंसानियत धीरे-धीरे संवेदनहीनता में बदलती जा रही है. ऐसे मामलों में सख्त कानून और जागरूकता दोनों की जरूरत है, ताकि हादसों के बाद मदद करना प्राथमिकता बने, तमाशा नहीं.