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  • 2025-12-28

Jharkhand Cyber Crime Update : नक्सलवाद नहीं, अब साइबर अपराध बना झारखंड पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती, छह वर्षों के आंकड़े चौंकने वाले

Ranchi : नक्सलवाद के दंश से उबर रहे झारखंड लिए वर्तमान में साइबर अपराधी बड़ी चुनौती बन गए हैं. जामताड़ा से निकले साइबर अपराधी अब अपनी जड़ें देश के बाहर भी जमा चुके हैं. साल 2025 के नवंबर महीने तक झारखंड के विभिन्न शहरों से 1200 साइबर अपराधी गिरफ्तार किए गए, लेकिन साइबर ठगी अभी भी बदस्तूर जारी है. पिछले 6 सालों में झारखंड पुलिस की सतर्कता की वजह से आम लोगों के 100 करोड़ के लगभग पैसे भी बचाए गए हैं.


तीन साल में 2100 साइबर अपराधी गिरफ्तार


झारखंड के छह जिले जामताड़ा, दुमका, देवघर, गिरिडीह, धनबाद और साइबर थाना रांची के द्वारा साल 2023 से लेकर 2025 के नवंबर महीने तक 1200 से ज्यादा साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है. तीन साल के कुल आंकड़ों की बात करें तो झारखंड के विभिन्न शहरों से कुल 2100 साइबर अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं.

पुलिस के सामने समस्या यह है कि वे चार साइबर अपराधी को पकड़कर सलाखों तक भेजते नहीं कि 10 और सक्रिय हो जाते हैं. ऐसे में साइबर अपराध का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है. साइबर अपराध और साइबर अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए मार्च 2016 में साइबर थाना रांची की शुरुआत हुई. अब तो जामताड़ा, धनबाद, गिरिडीह जैसे शहरों में भी साइबर थाने खोल दिए गए हैं. इन सबके बावजूद साइबर अपराधियों पर लगाम लगाने की सारी कोशिश बेकार साबित हो रही हैं.

क्या है गिरफ्तारी के आंकड़े

झारखंड देशभर में साइबर अपराधियों के खिलाफ सबसे ज्यादा कार्रवाई करने वाला राज्य है. सीआईडी से मिले आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में वर्ष 2019 से लेकर नवंबर 2025 तक कुल 6080 साइबर अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं. साल 2024 में कुल 1003 साइबर अपराधी गिरफ्तार किए गए. जबकि 2025 में गिरफ्तारी की संख्या 2100 रही.

साल 2019 से लेकर 2024 तक के आंकड़े

साल 2019 में 537 साइबर अपराधी गिरफ्तार किए गए.साल 2020 में 1022 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी हुई.साल 2021 में 1188 साइबर अपराधी गिरफ्तार किए गए.साल 2022 में 526 साइबर अपराधियों को दबोचा गया.साल 2023 में 870 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी हुई.साल 2024 में 1003 साइबर अपराधी गिरफ्तार किए गए.साल 2025 में 2100 साइबर अपराधी पकड़े गए हैं.
2019 से लेकर 2025 तक कितने कांड दर्ज हुए

साल 2019 में साइबर अपराध को लेकर 1385 केस दर्ज किए गए.साल 2020 में 1240 साइबर अपराध को लेकर केस दर्ज किए गए.साल 2021 में 1050 साइबर अपराध को लेकर केस दर्ज किए गए.साल 2022 में 901 साइबर अपराध को लेकर केस दर्ज किए गए.साल 2023 में 893 साइबर अपराध को लेकर केस दर्ज किए गए.साल 2024 में 714 साइबर अपराध को लेकर केस दर्ज किए गए.साल 2025 में 616 साइबर अपराध से जुड़े केस दर्ज किए गए.

रांची जिला का आंकड़ा

साइबर अपराध के मामले में राजधानी रांची एक नंबर पर है. साल 2019 से अगर हम साइबर अपराध के आंकड़ों पर गौर करें तो 2019 में राजधानी रांची में 481 मामले रिपोर्ट हुए, 2020 में ये मामले घट कर 286 हो गए, 2021 में 257, 2022 में 257, साल 2023 में 234, साल 2024 में 185 और साल 2025 में 120 मामले रिपोर्ट हुए.

बाकी जिलों की क्या है स्थिति

साइबर अपराध के मामले में धनबाद में 2019 से लेकर 2025 तक कुल 700 मामले रिपोर्ट हुए हैं. वहीं देवघर में 691, जामताड़ा में 738, जमशेदपुर में 485, हजारीबाग में 435, गिरिडीह में 389, रामगढ़ में 283, पलामू में 279, लातेहार में 264, सरायकेला में 230, बोकारो में 200, दुमका में 201, गोड्डा में 199, चतरा में 194, गढ़वा में 140, चाईबासा में 150, गुमला में 106, पाकुड़ में 95, साहिबगंज में 97, कोडरमा में 98, लोहरदगा में 85, खूंटी में 76 और सिमडेगा में 60 मामले रिपोर्ट हुए हैं.

तीन जिले सबसे ज्यादा बदनाम

झारखंड के चार जिले जामताड़ा, धनबाद, गिरिडीह और देवघर साइबर अपराध के लिए देश भर में बदनाम है, लेकिन आज के दौर में भी सबसे खतरनाक जामताड़ा ही है. उसके बाद देवघर और गिरिडीह है. सीआईडी के साइबर क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट के अनुसार आज भी साइबर अपराध के देश के सबसे पुराने मॉड्यूल जामताड़ा ही सबसे ज्यादा एक्टिव हैं. साइबर अपराधियो ने जामताड़ा मॉड्यूल का विस्तार कर दिया है. जिसकी वजह से रिकार्ड में जामताड़ा नहीं आता, लेकिन क्राइम वहीं से हो रहा या फिर जामताड़ा के साइबर अपराधी दूसरे राज्यों में जाकर क्राइम कर रहे हैं.


जामताड़ा मॉड्यूल का विस्तार

पिछले दो सालों के दौरान सीआईडी के साइबर क्राइम ब्रांच की जांच में साइबर अपराधियों का विदेशी कनेक्शन सामने आ रहा है. दरअसल, विदेशी कनेक्शन को साइबर अपराध की दुनिया में लाने का श्रेय भी जामताड़ा मॉड्यूल को ही जाता है. साइबर अपराध को लेकर जब झारखंड का जामताड़ा जिला बदनाम हुआ और देशभर की पुलिस जामताड़ा में छापेमारी कर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार करने लगी, तब जामताड़ा मॉड्यूल को हाईटेक करते हुए उसका कनेक्शन विदेश से कर दिया गया. पहले जो ठगी के पैसे देश के अंदर फर्जी डॉक्यूमेंट पर खोले गए बैंक खाते में जाते थे, अब वही पैसे विदेशों के बैंक अकाउंट में जाने लगे.

4.80 करोड़ रुपये फ्रीज, 2.65 करोड़ बरामद

2025 में साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान में झारखंड पुलिस ने अब तक दो करोड़ 80 लाख 50 हजार रुपये फ्रीज करवाकर पीड़ितों को वापस करवाया. इतना ही नहीं, 2 करोड़, 65 हजार 450 रुपये नगद भी बरामद किए. इसके अलावा 210 एटीएम कार्ड, 1772 मोबाइल, 100 पैन कार्ड, 1600 03 पीओएस मशीन, 67 पासबुक, 65 आधार कार्ड और 2552 सिम कार्ड भी बरामद हो चुके हैं.

इंटरनेट पर बिछाया है जाल

साइबर अपराधियों ने कई बैंकों की वेबसाइटों को हैक कर रखा रखा है. वेबसाइट के जरिए उनकी पहुंच हेल्पलाइन नंबर और ऑनलाइन कंप्लेंट फोरम तक भी है. टॉल फ्री नंबर या ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने वालों या इन्क्वायरी करने वालों के खाते की जानकारी साइबर अपराधी हासिल कर लेते हैं.

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक साइबर अपराधी बैंकों की वेबसाइट हैक कर डाटा की चोरी कर रहे हैं. साइबर अपराधी किसी भी वेबसाइट को हैक कर सकते हैं. इसके लिए वे लूप होल की तलाश करते हैं. इसके लिए पैन-टेस्टिंग करते हैं. पैन टेस्टिंग के जरिए संबंधित वेबसाइट की बैकडोर लूप, फायरवाल की स्थिति, स्क्रिप्ट डेटा समेत अन्य खामियों का पता लगा लेते हैं. इसके बाद वेबसाइट हैक कर संबंधित डेटा और विवरण का दुरुपयोग करते हैं. ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें वेबसाइट में दर्ज डेटा को भी छेड़छाड़ कर डिस्पले करते हैं.

वहीं दूसरी तरफ सेक्सटॉर्शन और डिजिटल अरेस्ट भी साइबर अपराधियों की नई ठगी के तरीके हैं. जिसके जरिए साइबर अपराधी लगातार लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं. डिजिटल अरेस्ट एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है. जिससे निपटने के लिए केंद्रीय एजेंसियां भी राज्य पुलिस के साथ मिलकर काम कर रही हैं.

साल 2013 से हुई थी शुरुआत

साल 2013 के करीब झारखंड से साइबर ठगी की शुरुआत हुई. जामताड़ा झारखंड का पहला ऐसा जिला बना जिसके एक छोटे से कस्बे के रहने वाले दर्जनों युवकों ने संगठित रूप से साइबर अपराध को अपनाया और उसके बलबूते करोड़ों रुपये की ठगी की. ठगी भी ऐसी-वैसी से नहीं की गई, बल्कि जामताड़ा के साइबर अपराधियों ने मुख्यमंत्री से लेकर सांसद तक को अपना निशाना बनाया. कभी समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर के लिए जाना जाने वाला जामताड़ा देखते ही देखते साइबर अपराध के केंद्र के रूप में देश भर में बदनाम हो गया. साइबर अपराध के लिए जिला इतना बदनाम हुआ कि इसके ऊपर एक वेब सीरीज भी बन गई है.

जामताड़ा का करमाटांड़ बना हब

साल 2016 से लेकर 2020 तक देश के किसी भी कोने में साइबर ठगी होती थी तो 80% मामलों में झारखंड के जामताड़ा जिले के करमाटांड़ का मोबाइल लोकेशन आता था. जिस राज्य में ठगी होती है वहां की पुलिस जामताड़ा दौड़ती नजर आती. पिछले 12 वर्षों में 14 राज्यों की पुलिस जामताड़ा में दर्जनों बार छापेमारी कर चुकी है. उस दौरान करमाटांड़ ब्लॉक के आसपास के दर्जन भर गांव ठगी का नया ठिकाना बने हुए थे. जब करमाटांड़ से साइबर ठगी की शुरुआत हुई उस समय ब्लॉक की आबादी 1.23 लाख थी. जिसमें 5 हजार से ज्यादा युवा साइबर ठगी में शामिल थे. जामताड़ा के साइबर अपराधियों ने ठगी के लिए बहुत ज्यादा तकनीक इस्तेमाल नहीं करते थे. शुरुआत में तो उन्होंने ठगने के लिए सिर्फ एक स्मार्टफोन, एक साधारण मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन ही इस्तेमाल किया. यहां के 12वीं से भी कम पढ़े-लिखे युवा अपराधी इतने सलीके से साइबर ठगी करते हैं कि ठगी के शिकार इन्हें पहचान भी नहीं पाते.

वर्ष 2016 में हुई 152 गिरफ्तारी

साल 2016 में साइबर ठगी के बढ़ते मामले को देखते हुए झारखंड पुलिस के द्वारा जामताड़ा में साइबर पुलिस स्टेशन खोला गया. कई अधिकारियों को साइबर अपराध से निपटने के लिए मोर्चे पर लगाया गया. नतीजा जामताड़ा में धड़ाधड़ गिरफ्तारियां शुरू हुईं. साल 2016 से जामताड़ा से जुड़े साइबर अपराध के 497 केस थानों में रजिस्टर्ड हुए. पुलिस ने जामताड़ा गैंग पर कार्रवाई शुरू की और 2016 में 152 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. हालांकि साल 2016 में साइबर अपराधियों के पास से किसी भी प्रकार की रिकवरी पुलिस नहीं कर पाई.

कई जिलों में फैला साइबर अपराध

जामताड़ा में जब पुलिस की दबिश तेज हुई, तब जामताड़ा मॉड्यूल को झारखंड के गिरिडीह, धनबाद, देवघर में शिफ्ट कर दिया गया. भगवान शिव की नगरी बाबा धाम यानी देवघर को दूसरे जामताड़ा में तब्दील कर दिया गया. झारखंड के जामताड़ा जिले से शुरू हुआ साइबर अपराधियों का जाल अब देवघर को अपने चपेट में ले चुका है. राज्य पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के मुताबिक 10 जनवरी 2025 तक अलग-अलग राज्यों की पुलिस ने झारखंड से साइबर अपराध के 1560 मामलों के अनुसंधान में मदद मांगी. इनमें से अधिकांश अपराधों को देवघर से अंजाम दिया गया था. इसमें से झारखंड पुलिस ने 890 मामलों की जांच पूरी कर बाहरी राज्यों की पुलिस को भेज दी. वहीं बाकी मामलों में अनुसंधान अब भी जारी है.

चुनौती के बावजूद बेहतर काम कर रही है झारखंड पुलिस झारखंड पुलिस के प्रवक्ता डॉक्टर माइकल राज के अनुसार झारखंड में न सिर्फ साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी हो रही है, बल्कि पिछले 1 साल के अंदर साइबर अपराधियों के हथियार जिनमें सिम कार्ड, लैपटॉप, मोबाइल फोन, वाहन, पासबुक और एटीएम कार्ड भी जब्त किए गए हैं. वहीं झारखंड पुलिस प्रतिबिंब के जरिए भी लगातार साइबर अपराधियों पर प्रहार कर रही है जो आगे भी जारी रहेगा.

हेल्पलाइन 1930 बेहतर काम कर रहा है

साइबर हेल्पलाइन 1930 के जरिए भी साइबर अपराध का शिकार होने वाले लोगों को बड़ी सहायता मिल रही है. सीआईडी के साइबर क्राइम ब्रांच से मिली जानकारी के अनुसार 2019 से लेकर साल 2025 तक 1930 के जरिए 54589 साइबर से जुड़े मामले के कंप्लेंट दर्ज किए गए. कंप्लेन के आधार पर झारखंड सीआईडी के द्वारा आम लोगों के लगभग 100 करोड़ रुपये बचाए गए.

कई साइबर थाने खोलने की योजना

साइबर अपराधी पुलिस के लिए हर दिन नई चुनौती पेश कर रहे हैं. झारखंड में पहले केवल जामताड़ा ही साइबर क्राइम को लेकर देश भर में बदनाम था, लेकिन अब धनबाद, देवघर और गिरिडीह जैसे शहरों से भी साइबर गिरोह का संचालन शुरू हो गया है. ऐसे में झारखंड में साइबर अपराध पर नकेल कसने के कवायद के तहत आठ नए जिलों में नए साइबर थाने खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

साइबर थानों की संख्या बढ़ी

झारखंड में साइबर अपराध से निपटने के लिए पूर्व से छह जिलों जामताड़ा, देवघर, गिरिडीह, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर और पलामू में साइबर क्राइम थाने 11 जनवरी 2013 से काम कर रहे हैं, लेकिन साइबर अपराध का दायरा हर दिन और व्यापक होता जा रहा है. ऐसे में झारखंड पुलिस मुख्यालय गृह विभाग को अन्य जिलों में भी साइबर थानों के सृजन का प्रस्ताव भेजा है, जिसे मंजूर कर लिया गया है. अब झारखंड के आठ जिलों रांची, लातेहार, हजारीबाग, दुमका, बोकारो, रामगढ़, चाईबासा और सरायकेला-खरसावां में साइबर क्राइम थाने का गठन किया गया है. जरूरत पड़ी तो और भी जिलों में थाने खोले जाएंगे.

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