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  • 2025-12-30

Jamshedpur News: जमशेदपुर में गुरु गोबिंद सिंह जी के 359वें प्रकाशोत्सव पर दो दिवसीय महान कीर्तन दरबार “नवां साल गुरु दे नाल” का भव्य शुभारंभ

Jamshedpur: सिख पंथ के दसवें पातशाही, दसमेश पिता कलगीधर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के 359वें प्रकाशोत्सव को समर्पित खालसा सेवा दल, जमशेदपुर द्वारा आयोजित दो दिवसीय महान कीर्तन दरबार “नवां साल गुरु दे नाल” का शुभारंभ साकची गुरुद्वारा प्रांगण में श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ हुआ। यह कीर्तन समागम वर्ष के अंतिम दो दिन 30 एवं 31 दिसंबर को गुरु साहिब के चरणों में नववर्ष मनाने की अनुपम भावना के साथ आयोजित किया गया है।

समागम के प्रथम दिन मंगलवार को श्री अखंड पाठ साहिब का भोग संपन्न हुआ। इसके पश्चात भव्य शोभा यात्रा निकाली गई, जिसमें सिख स्त्री सत्संग सभा साकची, सुखमणि साहिब कीर्तनी जत्था की बीबियाँ, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी साकची के सदस्य एवं बड़ी संख्या में संगत ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया। शोभा यात्रा की अरदास का सौभाग्य भाई अमृतपाल सिंह जी मन्नन को प्राप्त हुआ।



कार्यक्रम की शुरुआत हजूरी रागी श्री गुरुद्वारा साहिब साकची के भाई साहब भाई नारायण सिंह जी द्वारा गुरबानी कीर्तन से की गई। इसके उपरांत विशेष आमंत्रण पर पहुँचे कीर्तनी जत्थों ने भावपूर्ण शबद-कीर्तन प्रस्तुत किए, जिनमें प्रमुख रहे 

गनिव तेरी सिफत सच्चे पातशाह”,
“सुनी अरदास स्वामी मेरे, शरब कला बन आई” तथा
“सतगुर होय दयाल तां श्रद्धा पुरिये”।

इन पावन शबदों से संपूर्ण संगत निहाल हो उठी।

इसके पश्चात श्री दरबार साहिब, तरनतारन के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी जजबीर सिंह जी ने कथा-प्रवचन के माध्यम से गुरु महाराज की महिमा का गुणगान किया। उन्होंने कहा कि दाते का पहला गुण यह है कि जिसके पास गुरबानी नाम का अनमोल खजाना है, वही सच्चा धनवान है। 1666 ईस्वी में पटना साहिब की पावन धरती पर अवतार धारण करने वाले श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के पास नाम का अथाह खजाना था, इसी कारण उनके हृदय में उदारता और प्रेम की अविरल धारा प्रवाहित होती थी।




इस पावन समागम को प्रख्यात रागी जत्थों की उपस्थिति ने और भी दिव्य बना दिया। हजूरी रागी श्री दरबार साहिब अमृतसर के भाई सरूप सिंह, पटियाला से बीबी जसप्रीत कौर, तरनतारन से ज्ञानी जजबीर सिंह तथा साकची गुरुद्वारा साहिब के भाई नारायण सिंह जी अपने मधुर शबद-कीर्तन से संगत को गुरु चरणों में लीन कर रहे हैं।

समागम के दौरान गुरु का अटूट लंगर निरंतर बरताया जा रहा है। दोनों दिन दोपहर एवं रात्रि में गुरु का प्रसाद वितरित किया जाएगा। साथ ही सायंकालीन दीवान के दौरान संगत की सेवा में चाय एवं जलपान की विशेष व्यवस्था भी की गई है।
इस पावन आयोजन की सफलता में सन्नी सिंह बरियार, परमजीत सिंह काले, सतबीर सिंह गोल्डू, अमरपाल सिंह, गुरबख्श सिंह बख्शी, सोनी सिंह, श्याम सिंह, मणि सिंह, अमन सिंह सहित अन्य सेवादारों का सराहनीय योगदान प्राप्त हो रहा है।
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