Saraikela Kharsawan: सरायकेला-खरसावां में जहाँ एक ओर पूरी दुनिया आज नए साल 2026 के जश्न में डूबी है, वहीं झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में माहौल बेहद गमगीन और श्रद्धापूर्ण है। आज ही के दिन 1 जनवरी 1948 को खरसावां में आजाद भारत का सबसे बड़ा नरसंहार हुआ था। अपने उन पूर्वजों की शहादत को नमन करने के लिए आज सुबह से ही खरसावां शहीद बेदी पर झारखंड, बंगाल और ओडिशा के हजारों लोगों का जुटान हो रहा है।
बलिदानियों को नमन किया
खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता अर्जुन मुंडा अपनी धर्मपत्नी मीरा मुंडा के साथ खरसावां शहीद स्थल पहुंचे। इस अवसर पर उनके साथ भाजपा प्रदेश प्रवक्ता जेबी तुविद, जिला अध्यक्ष उदय सिंहदेव, रमेश हांसदा और आदित्यपुर नगर निगम के पूर्व डिप्टी मेयर अमित सिंह सहित कई गणमान्य नेता उपस्थित थे। सभी ने शहीद वेदी पर पुष्प अर्पित कर अमर बलिदानियों को नमन किया।
कांग्रेस और वर्तमान सरकार पर साधा निशाना
श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए अर्जुन मुंडा ने तत्कालीन और वर्तमान सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद आदिवासी सभ्यता और संस्कृति को सहेजने की जो जिम्मेदारी तत्कालीन कांग्रेस सरकार की थी, उसमें वह पूरी तरह विफल रही। उन्होंने खरसावां गोलीकांड के लिए सीधे तौर पर कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया।
इतिहास के पन्नों में दर्ज काला दिन
आज से ठीक 78 साल पहले, खरसावां रियासत को ओडिशा में मिलाए जाने के विरोध और अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया था। इस सभा को आदिवासियों के जननायक मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा संबोधित करने वाले थे। हालांकि, किसी कारणवश उनका कार्यक्रम टल गया, लेकिन भारी भीड़ वहां जुटी रही। इसी दौरान भीड़ को तितर-बितर करने के लिए तत्कालीन ओडिशा सरकार की पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां चला दीं। इस गोलीकांड में सैकड़ों (कुछ अनुमानों के अनुसार हजारों) लोग शहीद हो गए, हालांकि आज तक इसका कोई आधिकारिक स्पष्ट आंकड़ा सामने नहीं आ सका है।
श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचें मुख्यमंत्री
शहीदों के सम्मान में आज राज्य के मुख्यमंत्री, कई मंत्री, सांसद और विधायक खरसावां पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री शहीद बेदी पर पुष्प अर्पित कर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दिए। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और पूरे शहीद पार्क क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है ताकि लोग शांतिपूर्ण ढंग से अपनी परंपरा और श्रद्धा को निभा सकें।
परंपरा और विरासत का प्रतीक
हर साल 1 जनवरी को यहाँ जुटने वाले लोग बताते हैं कि यह दिन उनके लिए सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि अस्मिता और स्वाभिमान का प्रतीक है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों द्वारा सुबह से ही तेल, सिंदूर और फूलों के साथ पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना की जा रही है।