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  • 2026-01-02

Jharkhand News: झारखंड में संगठित अपराध का बढ़ता नेटवर्क, राहुल दुबे और राहुल सिंह गिरोह की सक्रियता से बढ़ी चुनौती

Jharkhand News: झारखंड में संगठित अपराध का नेटवर्क लगातार सक्रिय बना हुआ है. हाल के दिनों में राहुल दुबे और राहुल सिंह के गिरोहों की गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं. बताया जाता है कि इन दोनों गिरोहों से जुड़े कई अपराधी पहले अमन साहू गिरोह के लिए काम कर चुके हैं. अब ये गिरोह अलग पहचान के साथ झारखंड के अलग-अलग इलाकों में दहशत फैलाने में जुटे हैं.

सूत्रों के अनुसार राहुल दुबे और राहुल सिंह गिरोह के सदस्य कारोबारियों के घरों, निर्माण स्थलों और कोयला परियोजनाओं को निशाना बनाते हैं. लेवी वसूली के लिए फायरिंग कर भय का माहौल बनाना इनकी कार्यशैली का अहम हिस्सा है. इससे व्यवसायियों और स्थानीय लोगों में डर का माहौल बना हुआ है.

  • पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक राहुल दुबे साहू गिरोह की सक्रियता रांची, रामगढ़, हजारीबाग और चतरा जिलों में देखी जा रही है.
  • वहीं राहुल सिंह गिरोह रांची, पलामू, लातेहार और हजारीबाग में अपना नेटवर्क फैलाए हुए है. इसके अलावा पांडेय गिरोह रामगढ़, हजारीबाग, चतरा और पलामू में सक्रिय है. 
  • अखिलेश सिंह गिरोह जमशेदपुर क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए हुए है. श्रीवास्तव गिरोह रांची, रामगढ़, हजारीबाग, चतरा और लातेहार में सक्रिय बताया जा रहा है. प्रिंस खान गिरोह धनबाद और बोकारो इलाके में अपराध को अंजाम देता रहा है. 
  • सुजीत सिन्हा गिरोह पलामू, गढ़वा, लातेहार और रांची में सक्रिय है जबकि लव कुश शर्मा गिरोह की गतिविधियां मुख्य रूप से रांची तक सीमित हैं.

संगठित अपराध की घटनाओं में कुछ हद तक कमी
संगठित अपराध के बढ़ते खतरे को देखते हुए झारखंड पुलिस ने कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है. हाल के महीनों में पुलिस और एटीएस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान दो कुख्यात अपराधियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया है. झारखंड एटीएस द्वारा की गई सख्त कार्रवाई का असर यह रहा है कि संगठित अपराध की घटनाओं में कुछ हद तक कमी दर्ज की गई है. पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में गिरोहों के खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

लेवी वसूली और दहशत के लिए फायरिंग जैसी घटनाएं कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती
झारखंड में संगठित अपराध का स्वरूप अब केवल स्थानीय नहीं रहा बल्कि जिलों के बीच फैले नेटवर्क के रूप में सामने आ रहा है. लेवी वसूली और दहशत के लिए फायरिंग जैसी घटनाएं कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती हैं. हालांकि पुलिस और एटीएस की हालिया कार्रवाई से यह संकेत जरूर मिलता है कि राज्य में संगठित अपराध पर शिकंजा कसने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं. अब यह कार्रवाई कितनी निरंतर और प्रभावी रहती है, इसी पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी.
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