Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-01-02

Jamshedpur News: पेसा नियमावली पर राजनीति अनुचित, संवैधानिक प्रक्रिया से होनी चाहिए समीक्षा- सरयू राय

Jamshedpur News: जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने पेसा नियमावली को लेकर चल रही बहस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इस गंभीर संवैधानिक विषय को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है. उन्होंने जारी बयान में कहा कि सरकार और विपक्ष दोनों की ओर से आ रही प्रतिक्रियाएं राजनीतिक प्रेरणा से प्रभावित प्रतीत होती हैं.


सरयू राय ने कहा कि पेसा अधिनियम पारित होने के कई वर्षों तक नियमावली नहीं बन पाने से जो असमंजस की स्थिति बनी थी, वह वर्तमान राज्य सरकार द्वारा पेसा नियमावली बना दिए जाने से समाप्त हो चुकी है. अब विचार का विषय सिर्फ यह रह गया है कि सरकार द्वारा तैयार की गई नियमावली संविधान और कानून की भावना के अनुरूप है या नहीं.


उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अपनी समझ और विवेक के अनुसार पेसा नियमावली बनाई है. यदि इसमें कोई कमी सामने आती है और यह संवैधानिक या कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं पाई जाती है, तो इसमें संशोधन किया जा सकता है. सरकार के पास संशोधन का अधिकार है और वह आवश्यक समझे तो बदलाव कर सकती है.

सरयू राय ने कहा कि जिन बिंदुओं पर नियमावली को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उन्हें तथ्यों के साथ सरकार के सामने रखा जाना चाहिए. इससे नियमावली की कमियों की पहचान होगी और सुधार की दिशा तय की जा सकेगी.

विधायक ने स्पष्ट किया कि पेसा नियमावली का मूल उद्देश्य अधिसूचित क्षेत्रों में पंचायती राज व्यवस्था को वहां की सामाजिक और प्रशासनिक परिस्थितियों के अनुरूप लागू करना है. यह प्रावधान भारत के संविधान में निहित है, जिसके आधार पर केंद्र और राज्य सरकारों ने पेसा अधिनियम को लागू किया है.

उन्होंने कहा कि अधिसूचित क्षेत्रों में पंचायती राज के प्रावधान स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था के अनुरूप होने चाहिए. यही पेसा कानून और उसकी नियमावली की भावना है. राज्य सरकार यदि नियमावली को सार्वजनिक करती है और उसमें दिखाई देने वाली कमियों को चिन्हित किया जाता है, तो उसे संविधान और कानून की भावना के अनुरूप और बेहतर बनाया जा सकता है.

सरयू राय ने यह भी कहा कि किसी भी नियमावली में संशोधन की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है. सरकार के भीतर, न्यायपालिका के समक्ष और विधानसभा की प्रासंगिक समितियों के माध्यम से नियमावली का परीक्षण और विश्लेषण किया जा सकता है. ये सभी वैधानिक मार्ग हैं.

उन्होंने कहा कि इन वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत सरकार और नियमावली की आलोचना करने वाले पक्ष अपनी अपनी बात रखें तो असमंजस की स्थिति समाप्त हो सकती है. इसके विपरीत राजनीतिक उद्देश्य से नियमावली का समर्थन या विरोध करना संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है.

सरयू राय के अनुसार पेसा नियमावली एक गंभीर संवैधानिक विषय है. इसका उद्देश्य पंचायती राज व्यवस्था को स्वशासन और सुशासन के अनुरूप स्थापित करना है. ऐसे में इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से देखना उचित नहीं होगा.

सरयू राय का बयान पेसा नियमावली को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच संवैधानिक संतुलन पर जोर देता है. उन्होंने टकराव की राजनीति से हटकर वैधानिक और संस्थागत प्रक्रियाओं के जरिए समाधान निकालने की बात कही है. यह दृष्टिकोण इस मुद्दे को गंभीरता से समझने और स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत देता है.

WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !