Jharkhand News: हजारीबाग के लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा से तीन सजायाफ्ता कैदियों की फरारी ने राज्य की जेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यह घटना सिर्फ जेल से भागने तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें सुरक्षा में चूक प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की कमजोरियों की तस्वीर सामने आई है. फरारी की वारदात 30 दिसंबर की रात करीब दो बजे हुई लेकिन इसका खुलासा अगले दिन कैदियों की गिनती के दौरान हुआ जिससे निगरानी व्यवस्था की गंभीर खामियां उजागर हो गईं.
मामले की गंभीरता को देखते हुए हजारीबाग एसपी अंजनी अंजन ने विशेष जांच टीम का गठन किया है. एसआईटी में दो डीएसपी दो इंस्पेक्टर समेत कई वरीय पुलिस अधिकारी शामिल किए गए हैं. पुलिस की कुल पांच टीमें अलग-अलग दिशाओं में छापेमारी कर रही हैं. धनबाद, रांची और बिहार में भी दबिश दी जा रही है. पुलिस का कहना है कि फरार कैदियों को लेकर अहम सुराग मिले हैं और जल्द गिरफ्तारी की संभावना है.
फरारी पूरी तरह से पूर्व नियोजित
अब तक की जांच में सामने आया है कि फरारी पूरी तरह से पूर्व नियोजित थी. अंधेरा घनी धुंध और रात के समय बिजली आपूर्ति बाधित रहने की स्थिति का फायदा उठाकर कैदियों ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था को तोड़ा. जांच में यह भी सामने आया है कि जेल की चारदीवारी और खिड़कियों में लगे तारों में करंट नहीं था जिससे बाहर निकलने में कैदियों को कोई बड़ी बाधा नहीं हुई. मिडिया रिपोर्ट्स की माने तो बिजली नहीं रहने और धुंध के कारण रात में हर गतिविधि पर नजर रखना मुश्किल हो जाता है. जवानों का कहना है कि सीमित संसाधनों में उनसे बड़ी जिम्मेदारी निभाने की उम्मीद की जा रही है.
जांच के अनुसार बैरक नंबर छह की खिड़की नंबर चार को काटकर कैदियों ने रात करीब 1 बजकर 36 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट के बीच फरारी को अंजाम दिया. पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई लेकिन इसके बावजूद समय रहते अलर्ट सिस्टम सक्रिय नहीं हो सका. इस संबंध में लोहसिंघना थाना में प्राथमिकी संख्या-196/2025 दर्ज की गई है.
कुख्यात अपराधी हुए फरार
फरार कैदियों में कुख्यात देवा भुइयां का नाम प्रमुख है जिसके साथ जितेंद्र रवानी और राहुल रजवार फरार हुए. देवा भुइयां का हजारीबाग से पुराना नाता रहा है और वह इलाके से अच्छी तरह परिचित है. वर्ष 2021 में धनबाद जेल से फरार होने के बाद वह करीब साढ़े तीन साल तक फरार रहा था. उसके खिलाफ गैंगरेप समेत एक दर्जन से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. जितेंद्र रवानी पोक्सो एक्ट के मामले में दोषी है और उसे 22 साल की सजा सुनाई गई थी. धनबाद जेल में रहते हुए उसने आत्महत्या का प्रयास भी किया था. वहीं राहुल रजवार नाबालिग से जुड़े मामले में दोषी पाया गया था और उसे पोक्सो एक्ट के तहत उम्रकैद की सजा मिली थी.
जेल प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए हेड वार्डन हरेंद्र महतो और उमेश सिंह को किया निलंबित
घटना के अगले दिन जैप-7 के डीएसपी राजेंद्र कुमार ने जेल का निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की. ड्यूटी पर तैनात जवानों की पोस्टिंग और जिम्मेदारियों से जुड़ी रिपोर्ट ली गई. जानकारी के अनुसार एक पोस्ट पर चार जवान तैनात रहते हैं और प्रत्येक की ड्यूटी दो घंटे की होती है. इसके बावजूद इस तरह की घटना होना सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है. प्रारंभिक जांच के आधार पर जेल प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए हेड वार्डन हरेंद्र महतो और उमेश सिंह को निलंबित कर दिया है. जेल अधीक्षक सीपी सुमन ने निलंबन की पुष्टि की है.
फिलहाल एसआईटी फरार कैदियों के नेटवर्क उनके संभावित मददगारों और जेल के भीतर किसी भी तरह की मिलीभगत की जांच में जुटी है. पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.
जेल सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर सुधार की जरूरत
हजारीबाग जेल से हुई फरारी ने यह साफ कर दिया है कि जेल सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर सुधार की जरूरत है. सीसीटीवी के बावजूद अलर्ट सिस्टम का फेल होना और बुनियादी सुरक्षा इंतजामों की कमी सिस्टम पर बड़ा सवाल है. यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं हुई और सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं.