Jharkhand Politics: प्रदेश कांग्रेस ने मनरेगा कानून और उसके नाम में बदलाव के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है. कांग्रेस 5 जनवरी को मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत बापू वाटिका मोरहाबादी से लोक भवन तक पैदल मार्च करेगी. इसकी जानकारी शनिवार को कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने दी.
मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ था, जिसे केंद्र सरकार ने कमजोर कर दिया
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना ग्रामीण भारत की आत्मा पर हमला है. पहले मनरेगा के तहत योजनाओं का चयन गांव स्तर पर होता था, लेकिन अब केंद्र सरकार योजना पंचायत और गांव का चुनाव खुद करेगी. इससे जीरामजी योजना के जरिए क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होगा. उन्होंने कहा कि मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ था, जिसे केंद्र सरकार ने कमजोर कर दिया. कोरोना काल में मनरेगा ने गांवों में संजीवनी का काम किया था, जिसने इस योजना की अहमियत साबित की. अब प्रधानमंत्री इसे खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं.
भाजपा की विचारधारा महात्मा गांधी के विचारों के बिल्कुल उलट
प्रदेश अध्यक्ष ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने दस साल पहले मनरेगा को यूपीए सरकार का स्मारक बताया था. पहले हर पंचायत को मनरेगा के तहत राशि मिलती थी, लेकिन अब चुनिंदा पंचायतों तक ही फंड सीमित किया जा रहा है. इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर घटेंगे. वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि भाजपा की विचारधारा महात्मा गांधी के विचारों के बिल्कुल उलट है. इसी वजह से गांधी जी के नाम को हटाकर नई योजना लाई गई. भाजपा नहीं चाहती कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़े, आर्थिक मजबूती आए और लोगों की क्रय शक्ति बढ़े.
भाजपा की पूंजीवादी सोच साफ झलकती है
उन्होंने कहा कि इससे भाजपा की पूंजीवादी सोच साफ झलकती है. योजना के नाम में बदलाव भाजपा की मानसिकता को दर्शाता है. हिंदू धर्म को योजनाओं से भावनात्मक रूप से जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार 125 दिन रोजगार देने की बात करती है, लेकिन अगर सभी निबंधित मजदूरों को रोजगार दिया गया तो इसके लिए बड़ी राशि की जरूरत होगी, जिसका बजटीय प्रावधान नहीं है. इससे साफ है कि सरकार मजदूरों के साथ छल कर रही है.
मनरेगा में रोजगार की कानूनी गारंटी थी
पूर्व वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि मनरेगा लागू होने के समय विपक्ष ने भी इसकी सराहना की थी. इस योजना ने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदली और यह बात सही साबित हुई. उन्होंने कहा कि हमारे मौलिक अधिकारों में रोजगार का अधिकार शामिल नहीं है, लेकिन मनरेगा में रोजगार की कानूनी गारंटी थी. भाजपा ने मौजूदा कानून में बरसात के दिनों में 60 दिनों के लिए रोजगार बंद कर दिया, जबकि पहले बरसात में भी कई तरह के काम होते थे और हो सकते हैं.
भाजपा शासन के दौरान ही झारखंड में मनरेगा घोटाला हुआ
डॉ उरांव ने कहा कि रोजगार के मामले में केंद्र सरकार ने राज्यों की उपेक्षा की है. नई योजना में केंद्र और राज्य का अंशदान 60 और 40 तय किया गया है, जिससे झारखंड जैसे गरीब राज्यों को अपना हिस्सा देना मुश्किल होगा. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार मनरेगा में गड़बड़ी की बात करती है, जबकि भाजपा शासन के दौरान ही झारखंड में मनरेगा घोटाला हुआ था. अगर योजना में कमी थी तो उसमें सुधार किया जा सकता था, न कि उसे कमजोर किया जाए.
5 जनवरी को पैदल मार्च
कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ आंदोलन की विस्तृत रूपरेखा भी जारी की है. 5 जनवरी को पैदल मार्च होगा. 8 जनवरी को राज्य स्तर के नेताओं की तैयारी बैठक होगी. 10 जनवरी को जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी. 11 जनवरी को एक दिवसीय उपवास और धरना होगा. 12 जनवरी से 30 जनवरी तक पंचायत स्तर पर चौपाल, नुक्कड़ सभा और पंपलेट वितरण किया जाएगा. 30 जनवरी को शहीद दिवस पर बैठक होगी. 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला स्तरीय धरना होगा. 7 फरवरी से 15 फरवरी तक राज्य स्तरीय विधानसभा या लोक भवन घेराव किया जाएगा. 16 फरवरी से 25 फरवरी के बीच देश के अलग अलग क्षेत्रों में चार मनरेगा बचाओ रैली आयोजित होंगी.
आंदोलन की लंबी रूपरेखा
मनरेगा को लेकर कांग्रेस का यह आंदोलन केवल योजना के नाम या स्वरूप का विरोध नहीं है, बल्कि ग्रामीण रोजगार, संघीय ढांचे और राज्यों की भूमिका को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सीधा सवाल खड़ा करता है. आंदोलन की लंबी रूपरेखा यह संकेत देती है कि कांग्रेस इस मुद्दे को चुनावी और सामाजिक दोनों स्तरों पर मजबूत ढंग से उठाने की तैयारी में है.