Bokaro: बोकारो की 18 वर्षीय युवती के पिछले सात महीनों से लापता रहने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। युवती की मां द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने बोकारो के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को वर्चुअल माध्यम से कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एसपी से सीधे सवाल किया कि जब युवती 31 जुलाई 2025 से लापता है, तो उसकी बरामदगी के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और आखिर उसे कब तक सुरक्षित ढूंढ लिया जाएगा।
पुलिस ने छापेमारी और संदिग्ध से पूछताछ की दी जानकारी
कोर्ट में पेश हुए एसपी ने बताया कि बोकारो और आसपास के तीन-चार स्थानों पर लगातार छापेमारी की गई है। एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने यह भी कहा कि संदिग्ध का नार्को टेस्ट कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, ताकि मामले की सच्चाई सामने आ सके।
हालांकि, अब तक युवती का कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की।
दो सप्ताह में शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश
हाईकोर्ट ने बोकारो एसपी को निर्देश दिया है कि वे दो सप्ताह के भीतर शपथ पत्र दाखिल कर मामले की वर्तमान स्थिति और अब तक की कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करें। इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की गई है।
दिसंबर में आया था फोन, पुणे में होने की दी गई थी सूचना
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विनसेंट रोहित मार्की ने कोर्ट को बताया कि युवती 31 जुलाई 2025 से लापता है। इस संबंध में पिंडराजोड़ा थाना में कांड संख्या 147/2025 दर्ज किया गया था।
परिजनों को 11 दिसंबर 2025 को एक मोबाइल कॉल आया था, जिसमें बताया गया कि उनकी बेटी पुणे में है। सूचना के आधार पर पुलिस ने फोन करने वाले युवक को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने दावा किया कि युवती उसके एक दोस्त के पास पुणे में है।
पुणे जाते समय आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार
पुलिस टीम युवती के पिता और पकड़े गए युवक को साथ लेकर ट्रेन से पुणे जा रही थी। लेकिन यात्रा के दौरान आरोपी युवक पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। इसके बाद से पुलिस की तलाश जारी है, मगर अब तक युवती का कोई सुराग नहीं मिल सका है।
इस पूरी घटना ने न सिर्फ परिवार की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजरें 19 मार्च की अगली सुनवाई पर टिकी हैं.