हीरोइन से मां तक का सफर कामिनी कौशल का बेमिसाल करियर कामिनी कौशल ने अपने करियर में नायिका से लेकर पर्दे पर सशक्त मां के किरदार तक निभाए और दर्शकों के दिलों में अपनी अमिट छाप छोड़ी।
जन्म और शुरुआती जीवन
उनका असली नाम उमा कश्यप था और उनका जन्म 24 जनवरी 1927 को लाहौर में हुआ था। वह मशहूर वनस्पतिशास्त्री प्रोफेसर एसआर कश्यप की सबसे छोटी संतान थीं। महज 7 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया। बचपन से ही मेधावी उमा ने 10 साल की उम्र में अपना कठपुतली थिएटर बनाया और आकाशवाणी पर रेडियो प्ले भी किए।
करियर की चमकदार शुरुआत
उमा को बड़ा ब्रेक तब मिला जब फिल्म डायरेक्टर चेतन आनंद ने उनकी मीठी आवाज़ सुनी और अपनी फिल्म नीचा नगर में मौका दिया। चेतन आनंद ने ही उनका नाम बदलकर कामिनी रखा, क्योंकि उनकी पत्नी का नाम भी उमा था।
1946 में, सिर्फ 20 साल की उम्र में, उन्होंने नीचा नगर से डेब्यू किया। यह फिल्म कान फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई और प्रतिष्ठित गोल्डन पाम पुरस्कार जीता। इस सफलता ने कामिनी को रातों-रात स्टार बना दिया।
यादगार फिल्में और अवॉर्ड
कामिनी कौशल की हिट फिल्मों की लिस्ट लंबी है, जिनमें शहीद (1948), नदिया के पार (1948), आग (1948), जिद्दी (1948), शबनम (1949) और आरजू (1950) जैसी फिल्में शामिल हैं। उन्हें 1954 में फिल्म बिराज बहू में शानदार अभिनय के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था।
वह बाद में मनोज कुमार की ऑन-स्क्रीन मां बनकर भी बेहद लोकप्रिय हुईं। उन्होंने हर पीढ़ी के स्टार्स के साथ काम किया। उनकी आखिरी यादगार भूमिकाएँ कबीर सिंह में शाहिद कपूर की दादी और चेन्नई एक्सप्रेस में शाहरुख खान की दादी के रूप में थीं। कामिनी कौशल का निधन बॉलीवुड के एक सुनहरे अध्याय का समापन है। उनकी अभिनय यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।