Export Duty Hike: केंद्र सरकार ने ईंधन निर्यात से जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए डीजल पर 14 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ पर 12.50 रुपये प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है. नई दरें मंगलवार से पूरे देश में लागू हो गई हैं. हालांकि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है. सरकार का कहना है कि इस फैसले का आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर नहीं पड़ेगा.
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच सरकार ने घरेलू सप्लाई सुरक्षित रखने पर दिया जोर
सरकार ने साफ किया है कि पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और नेचुरल गैस की देश में पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है. पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चित हालात को देखते हुए घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए यह कदम उठाया गया है. पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर लगने वाले शुल्क की समीक्षा हर 15 दिन में कच्चे तेल की औसत कीमतों के आधार पर की जाती है. इससे पहले एक जून को दरों में बदलाव किया गया था.
मांग के पैटर्न में बदलाव से बढ़ा दबाव, रिफाइनरियां पूरी क्षमता से कर रहीं काम
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से उत्पादन कर रही हैं और सप्लाई सामान्य बनी हुई है. मई में करीब 42 करोड़ लीटर डीजल की मांग बल्क पंपों से हटकर रिटेल आउटलेट की तरफ पहुंच गई, जिससे कुछ इलाकों में दबाव बढ़ा. मंत्रालय ने बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं से अपने निर्धारित पंपों से ही डीजल लेने की अपील की है ताकि आम लोगों के लिए खुले पंपों पर अतिरिक्त बोझ न बढ़े.
200 लीटर की सीमा लागू, अगले 90 दिनों तक रहेगी अस्थायी व्यवस्था
आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए 11 जून की अधिसूचना के तहत रिटेल पंपों से एक व्यक्ति को एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल खरीदने की अनुमति दी गई है. औद्योगिक और कमर्शियल उपभोक्ताओं को अलग निर्धारित पंपों से सप्लाई लेने का निर्देश दिया गया है. सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था करीब 90 दिनों के लिए अस्थायी तौर पर लागू की गई है ताकि सप्लाई व्यवस्था सुचारु बनी रहे और लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
सरकार ने बढ़ती मांग और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए डीजल और एटीएफ के निर्यात शुल्क में बदलाव किया है. साथ ही घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कई अस्थायी कदम भी उठाए गए हैं. सरकार का दावा है कि इन फैसलों का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और देश में ईंधन आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना है.