Jamtara: जामताड़ा जिले में तापमान बढ़ने के साथ ही पेयजल की समस्या गंभीर होती जा रही है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में हालात चिंताजनक हो गए हैं, जहां लोगों की निर्भरता मुख्य रूप से चापाकलों पर है। लेकिन बड़ी संख्या में ये चापाकल खराब पड़े होने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हजारों चापाकल बंद, हालात बिगड़ने के आसार
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में करीब 16 हजार चापाकल लगाए गए हैं। इनमें से लगभग 2,900 चापाकल फिलहाल काम नहीं कर रहे हैं। इससे आने वाले दिनों में जल संकट और गहरा सकता है, खासकर जब गर्मी अपने चरम पर पहुंचेगी।
तकनीकी खराबी और बजट की कमी बनी बड़ी वजह
जानकारी के मुताबिक, करीब 1300 चापाकल "स्पेशल रिपेयर" श्रेणी में हैं, जो तकनीकी खामियों के कारण बंद हैं। वहीं करीब 1600 चापाकल सामान्य मरम्मत की प्रतीक्षा में निष्क्रिय पड़े हैं। विभाग के पास मरम्मत के लिए पर्याप्त फंड नहीं होने के कारण स्थिति और भी बिगड़ती जा रही है।
अप्रैल से हालात और बिगड़ने की आशंका
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में जो बजट उपलब्ध है, वह मार्च तक ही पर्याप्त है। यदि समय पर अतिरिक्त राशि नहीं मिली, तो अप्रैल से जल संकट और भी गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में पानी को लेकर हाहाकार मचने की आशंका जताई जा रही है।
राज्य मुख्यालय को भेजा गया प्रस्ताव
कार्यपालक अभियंता अनूप महतो ने बताया कि खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था। उन्होंने कहा कि कुछ श्रेणियों के लिए राशि स्वीकृत हो चुकी है और जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
जमीन पर अब भी लोग परेशान
हालांकि विभाग की ओर से जल्द मरम्मत का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि गांवों में लोग अब भी पानी के लिए जूझ रहे हैं। महिलाएं और बच्चे दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाने को मजबूर हैं।
जल्द समाधान की उम्मीद
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि मरम्मत कार्य कब शुरू होता है और लोगों को राहत कब मिलती है। बढ़ती गर्मी के बीच स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।