Jharkhand News: चाईबासा जिले की 19 वर्षीय आदिवासी युवती मोंगड़ी होनहागा के राउरकेला में कथित नक्सली के रूप में सरेंडर करने के मामले ने अब कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रांची में भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पुलिस का दावा है कि मोंगड़ी पिछले दो वर्षों से नक्सली गतिविधियों में शामिल थी और वह लोकल गुरिल्ला स्क्वायड की सदस्य के रूप में काम कर रही थी। हालांकि, इस दावे पर अब संदेह जताया जा रहा है।
नौकरी का झांसा दे कर ले जाने का आरोप
परिवार का कहना है कि मोंगड़ी का किसी भी नक्सली संगठन से कोई संबंध नहीं रहा है। उनके अनुसार, करीब दो साल पहले गांव का ही एक युवक उसे नौकरी का झांसा देकर राउरकेला ले गया था। परिजनों ने उस युवक की गतिविधियों को संदिग्ध बताते हुए उसे पुलिस के लिए काम करने वाला बताया है।
जानकारों का यह भी कहना है कि भाकपा माओवादी संगठन में “लोकल गुरिल्ला स्क्वायड” नाम का कोई आधिकारिक डिवीजन नहीं होता। ऐसे में यह सवाल उठता है कि युवती को इस स्क्वायड का सदस्य कैसे बताया गया। मोंगड़ी होलोमुली मरंगपोंगा गांव की रहने वाली है। परिजनों का आरोप है कि उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर बाहर ले जाया गया और अब उसे नक्सली बताकर सरेंडर दिखाया गया है।
इस मामले के सामने आने के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं युवती को किसी साजिश के तहत नक्सली के रूप में पेश तो नहीं किया गया। अब पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।