Jharkhand: झारखंड में हाथियों के बढ़ते उत्पात और उससे होने वाली जान-माल की हानि को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में बड़ी घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार हाथियों से सुरक्षा के लिए जल्द ही एक मानक संचालन प्रक्रिया SOP तैयार करेगी।
ठोस रणनीति पर जोर
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में चर्चा के दौरान कहा कि मानव-हाथी संघर्ष की बढ़ती घटनाएं राज्य के लिए एक गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने बताया कि सरकार केवल तात्कालिक राहत तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एक ठोस और दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है। इसके लिए वन विभाग को विशेषज्ञों और संबंधित एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
SOP के मुख्य बिंदु और सुरक्षा उपाय
सरकार द्वारा तैयार की जाने वाली नई एसओपी में मुख्य रूप से निम्नलिखित पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा हाथी के हमले में घायल होने या संपत्ति के नुकसान पर प्रभावित परिवारों को मिलने वाली मुआवजा राशि और सहायता की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को हाथियों के व्यवहार और उनसे बचने के तरीकों के बारे में शिक्षित करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा। वन विभाग हाथियों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीक और स्थानीय गज साथी नेटवर्क को मजबूत करेगा। प्रभावित गांवों में सोलर फेंसिंग और ट्रेंच जैसे सुरक्षा उपायों का विस्तार किया जाएगा।
ग्रामीणों की सुरक्षा सर्वोपरि
मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, हाथी हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन इंसानी बस्तियों में उनका प्रवेश जानलेवा साबित हो रहा है। हम ऐसी व्यवस्था बनाएंगे जिससे मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव को न्यूनतम किया जा सके।
झारखंड के कई जिले जैसे चतरा, लोहरदगा, और गिरिडीह लंबे समय से हाथियों के आतंक से जूझ रहे हैं। सरकार के इस कदम से इन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों ग्रामीणों को सुरक्षा की नई उम्मीद मिली है।