National News: नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म मामले में आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. जोधपुर बेंच ने विशेष पॉक्सो अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए उनकी अपील खारिज कर दी. हालांकि मामले में सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया.
यह फैसला जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने सुनाया. अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा के बाद कहा कि आसाराम के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर हैं और उन्हें पर्याप्त प्रमाणों का समर्थन प्राप्त है.
फिलहाल आसाराम मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत पर बाहर चल रहे हैं, लेकिन हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद अब उन्हें दोबारा सरेंडर करना होगा. इस मामले को देश के चर्चित आपराधिक मामलों में गिना जाता है.
पूरा मामला वर्ष 2013 का है, जब जोधपुर स्थित आश्रम में एक नाबालिग छात्रा के साथ यौन शोषण का आरोप सामने आया था. शिकायत के बाद पुलिस ने आसाराम को गिरफ्तार किया था. पीड़िता ने आरोप लगाया था कि इलाज और आध्यात्मिक उपाय के नाम पर उसके साथ दुष्कर्म किया गया.
करीब पांच साल चली सुनवाई के बाद अप्रैल 2018 में विशेष पॉक्सो अदालत ने आसाराम को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. उसी फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी.
अब हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद आसाराम के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प बचा है. हालांकि फिलहाल उनकी उम्रकैद की सजा प्रभावी रहेगी.