National News: भारत का मध्य वर्ग आजकल महंगे स्मार्टफोन, लग्जरी वाहन और शाही जीवनशैली के लिए कर्ज के जाल में फंसता जा रहा है. लोग अपनी कमाई से ज्यादा खर्च करने की होड़ में ईएमआई और पर्सनल लोन पर निर्भर हो गए हैं. दूसरी ओर धनवान वर्ग बिना शोर मचाए संपत्ति निर्माण और निवेश पर ध्यान केंद्रित कर रहा है.
मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत में हर दूसरा व्यक्ति किसी न किसी कर्ज में डूबा है. चाहे पर्सनल लोन हो कार लोन या क्रेडिट कार्ड का बकाया. लगभग 70 प्रतिशत आईफोन और 80 प्रतिशत कारें ईएमआई पर खरीदी जा रही हैं. यह साफ दर्शाता है कि मध्य वर्ग कर्ज लेकर स्टेटस बनाए रखने की जुगत में लगा है.
साल 2023 से मई 2025 तक देशवासियों ने 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का पर्सनल लोन उठाया. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा युवा नौकरीपेशा वर्ग का है. इसी अवधि में डीमैट खातों की संख्या 19 करोड़ पार कर गई. मतलब लोग कर्ज लेकर शेयर बाजार में भी दांव लगा रहे हैं. विशेषज्ञ इसे अत्यधिक जोखिम भरा बता रहे हैं. कोई व्यक्ति पर्सनल लोन से छोटी कंपनियों के शेयरों में निवेश कर 40 प्रतिशत मुनाफा कमा लेता है लेकिन हर निवेशक भाग्यशाली नहीं होता.
मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो अमीर और मध्य वर्ग की सोच में मूल अंतर है. अमीर कर्ज को संपत्ति बनाने का माध्यम मानते हैं जबकि मध्य वर्ग इसे जिम्मेदारियां खरीदने का जरिया समझता है. शिक्षा घर या व्यवसाय के लिए लिया कर्ज उचित है लेकिन फोन कार या जीवनशैली के लिए उठाया कर्ज वित्तीय कमजोरी का संकेत. यदि यह प्रवृत्ति यूं ही जारी रही तो आने वाले वर्षों में मध्य वर्ग पर कर्ज का बोझ आर्थिक संकट पैदा कर सकता है.
यह रिपोर्ट मध्य वर्ग की बदलती खपत आदतों और वित्तीय जोखिमों को उजागर करती है. लोन आधारित जीवनशैली तात्कालिक सुख दे सकती है लेकिन दीर्घकाल में परिवार की आर्थिक स्थिरता को खतरे में डालती है. इसे गंभीरता से लेते हुए बचत और समझदार निवेश पर जोर देना जरूरी है.