Stock Market: शेयर बाजार नई चोटी छूने के बिल्कुल करीब पहुंच गया है. निफ्टी अपने सर्वकालिक रिकॉर्ड से 210 अंक दूर है, जबकि सेंसेक्स लाइफ टाइम हाई से 746.33 अंक पीछे चल रहा है. बाजार में अनुमान था कि सोमवार को दोनों सूचकांक नया इतिहास रच सकते हैं, लेकिन रुपये की लगातार गिरती चाल ने इस रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है. बाजार विश्लेषकों का कहना है कि कमजोर पड़ता रुपया बाजार के सामने दीवार बनकर खड़ा हो गया है और इंडेक्स को नई ऊंचाई से रोक सकता है.
शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 89.49 पर बंद हुआ, जो अपने पुराने निचले स्तर 88.80 को भी पार कर गया. एक ही दिन में 0.9 प्रतिशत की गिरावट मई के बाद सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है. रुपये की कमजोरी के बीच विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को 1700 करोड़ रुपये की इक्विटी बेच डाली. विश्लेषकों का कहना है कि गिरता रुपया डॉलर में समायोजित रिटर्न को कम कर देता है, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ता है.
इसी कमजोरी के बावजूद शेयर बाजार में तेजी दिखी है. सप्ताह के दौरान निफ्टी 0.61 प्रतिशत बढ़कर 26068.15 पर पहुंच गया, जबकि सेंसेक्स 0.79 प्रतिशत की बढ़त के साथ 85231.92 अंक तक गया. यह बढ़त भारत अमेरिका ट्रेड टॉक, मजबूत दूसरी तिमाही के नतीजों और घटती महंगाई की उम्मीदों पर टिकी हुई थी.
विश्लेषकों के अनुसार रुपये में दबाव आगे भी बना रह सकता है. अनुमान है कि दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले 90.50 से 91.00 के दायरे में रह सकती है. तकनीकी विश्लेषण संकेत देते हैं कि करेंसी में नुकसान गंभीर हो सकता है. वहीं बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कमजोरी विदेशी निवेशकों की रुचि को प्रभावित कर सकती है और बाजार पर इसका असर दिख सकता है.
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार बेहतर आय, घटती महंगाई और ट्रेड टॉक से पूरे सप्ताह तेजी का रुझान बना रहा, लेकिन शुक्रवार को दिखी अस्थिरता ने बाजार की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया. ग्लोबल संकेतों में कमजोरी और फेड की दर कटौती उम्मीदों के कमजोर पड़ने से भी बाजार पर दबाव बढ़ा है. नायर का कहना है कि अगर रुपये की गिरावट जारी रही तो बाजार में निकट भविष्य में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है.
रुपये की गिरावट भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है. विदेशी निवेशक डॉलर आधारित रिटर्न को देखते हैं और करेंसी की कमजोरी उनके निवेश निर्णयों को प्रभावित करती है. बाजार की बुनियादी स्थिति मजबूत होने के बावजूद करेंसी वोलैटिलिटी इंडेक्स के लिए बड़ा जोखिम है. यदि आने वाले दिनों में रुपया स्थिर नहीं हुआ, तो बाजार की बढ़त पर असर पड़ सकता है और नए रिकॉर्ड बनने में देरी हो सकती है.