आयोग के अनुसार, इन अधिकारियों पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान गंभीर कदाचार, कर्तव्य में लापरवाही और अपने वैधानिक अधिकारों के गलत इस्तेमाल का आरोप है। जांच में पाया गया कि इन अधिकारियों ने बिना उचित दस्तावेजों और पात्रता की जांच किए कई मामलों को मंजूरी दे दी थी। आयोग ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह कार्रवाई की है।
निलंबित अधिकारियों की सूची
निलंबित किए गए अधिकारियों में शामिल हैं, सफी उर्रहमान, एईआरओ, शमशेरगंज मुर्शिदाबाद नीतीश दास, राजस्व अधिकारी व एईआरओ, फरक्का डालिया रे चौधरी, महिला विकास अधिकारी व एईआरओ, मैनागुड़ी एसके मुर्शिद आलम, एईआरओ, सूती ब्लॉक सत्यजीत दास व जॉयदीप कुंडू: एईआरओ, कैनिंग पुरबो, देबाशीष बिस्वास, संयुक्त बीडीओ व एईआरओ, डेबरा।
मुख्य सचिव को सख्त निर्देश
निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इन अधिकारियों के खिलाफ संबंधित विभागों के माध्यम से तुरंत अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जाए। साथ ही, आयोग ने इस संबंध में की गई प्रगति की रिपोर्ट भी मांगी है।
टकराव की स्थिति
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस प्रक्रिया की समय सीमा को एक सप्ताह बढ़ाने का आदेश दिया था। आयोग का यह कड़ा रुख स्पष्ट करता है कि चुनावी प्रक्रिया की शुचिता से समझौता करने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।