सतीश सिंह ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। विशिष्ट अतिथि कोल्हान विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ अशोक झाने कहा कि शिक्षकों को समय के परिवर्तन को समझना चाहिए , आज छात्रों के सामने अनेक तरह की सामग्री परोसी जा रही है लेकिन एक अच्छे शिक्षक को जानकारी का सही उपयोग करना चाहिए ।उन्होंने कहा कि विकसित भारत को का सपना युवा कंधों पर है। शिक्षकों को जिज्ञासु होना चाहिए ,उन्हें भविष्य को समझने की जरूरत है।
इस अवसर पर सत्र 19-21, 20-22 और 21-23 के छात्रों ने दीक्षांत समारोह में भाग लिया। करीब 130 छात्र इस समारोह में शामिल हुए
बी. चंद्रशेखर, ललित चंद्रशेखर (चेयरपर्सन), भानुमति नीलकंठण, कमला सुब्रमण्यम, प्रिया धर्मराजन, सुधा दिलीप, प्राचार्य डॉक्टर जूही समर्पिता, उप-प्राचार्य डॉ मोनिका उप्पल ने छात्रों को कोल्हन विश्वविद्यालय की बी.एड. डिग्री प्रदान की तथा उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
एकरूपता होनी चाहिए तभी भारत सरकार का उद्देश्य पूरा हो सकेगा
मुख्य अतिथि सरजू राय ने कहा कि विश्वविद्यालय को प्रबंधकीय तरीके से चलना चाहिए .उन्होंने कहा कि जब तक विश्वविद्यालय संस्था के रूप में काम नहीं करता तब तक शिक्षा में सारा निवेश व्यर्थ हो जाता है. परीक्षा परिणाम में देर होने के कारण मेधावी छात्रों का परिश्रम बर्बाद हो जाता है. उन्होंने कहा कि डीबीएमएस कॉलेज एक संस्था के रूप में काम करता है. नीयत यदि सही नहीं हो तो लाभ नहीं मिलता. प्राइवेट और गवर्नमेंट स्कूलों में एकरूपता होनी चाहिए तभी भारत सरकार का उद्देश्य पूरा हो सकेगा।
कोल्हान विश्वविद्यालय के प्रवक्ता तथा एलबीएसएम कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर अशोक कुमार झा अविचल ने कहा कि शिक्षकों को समय के परिवर्तन को समझना चाहिए. आज छात्रों के सामने अनेक तरह की सामग्री परोसी जा रही है, लेकिन एक अच्छे शिक्षक को जानकारी का सही उपयोग करना चाहिए. उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना युवा पीढ़ी के कंधों पर है. शिक्षकों को जिज्ञासु होना चाहिए.उन्हें भविष्य को समझने की जरूरत है . ए आई के बाद क्या, इस पर भी उन्हें चिंतन करना चाहिए।
भानु नीलकंठन ने प्रेरणादायक कहानियों के द्वारा शिक्षकों को जीवन में अच्छा लोकप्रिय शिक्षक बनने के गुर बताए
बी चंद्रशेखर ने कहा कि डीबीएमएस कॉलेज में शिक्षण के अलावा अन्य गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जाता है. व्यवसायिक कौशल सिखाया जाता है जिससे भावी शिक्षक समाज के बदलते स्वरूप को पहचान सके. बी. चंद्रशेखर ने कहा इस शिक्षण संस्थान में पढ़ाए गए पाठ को जीवन में उतारने की आवश्यकता है। आपके व्यवहार से एक शिक्षित शिक्षक की नैतिकता झलकनी चाहिए।
डॉक्टर जूही समर्पित ने छात्रों को अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहां की राष्ट्र निर्माण की बहुत बड़ी जिम्मेवारी शिक्षकों को सौंपी गई है। भारतीय ज्ञान परंपरा को अपनाकर शिक्षकों को नवाचार विधि शिक्षण में अपनाना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती अंजलि गणेशन ने किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन पामेला घोष दत्ता ने दिया। कार्यक्रम की आशातीत सफलता के पीछे डी.बी.एम.एस. कॉलेज के शिक्षक, कर्मचारीगण, गैरशिक्षण कर्मचारी की अथक मेहनत थी।