श्रद्धांजलि सभा में उमड़ा जनसैलाब
जियरपपा मैदान में आयोजित इस सभा में राज्य के विभिन्न जिलों से सैकड़ों आदिवासी प्रतिनिधि और ग्रामीण शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत पूरे विधि-विधान के साथ पत्थलगढ़ी कर की गई, जिसमें शिलापट पर स्व. सोमा मुंडा का नाम अंकित कर उन्हें अमर सम्मान दिया गया। इस दौरान सोमा मुंडा द्वारा संचालित विद्यालय के बच्चों ने भी नम आंखों से अपने संरक्षक को विदाई दी।
प्रशासन को अल्टीमेटम और सीबीआई जांच की मांग
आदिवासी सरना समिति के फूलचंद तिर्की ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, "पुलिस को 72 घंटे का समय दिया गया था, लेकिन प्रशासन हत्यारों को पकड़ने में विफल रहा है। अब हमारे पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।" सभा में मौजूद सभी नेताओं ने एक स्वर में मांग की कि इस हत्याकांड की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच CBI से कराई जाए।
भू-माफियाओं पर हत्या का आरोप
पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, भारत आदिवासी पार्टी के प्रेमशाही मुंडा और जिला परिषद अध्यक्ष मसीह गुड़िया समेत अन्य वक्ताओं ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पुलिस-प्रशासन जमीन दलालों को संरक्षण दे रहा है। नेताओं का दावा है कि सोमा मुंडा की हत्या जमीन हड़पने वाले गिरोहों द्वारा सुनियोजित तरीके से की गई है।
17 जनवरी को चक्का जाम की चेतावनी
समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि 17 जनवरी से पहले हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो पूरे राज्य में चक्का जाम किया जाएगा। आदिवासी नेताओं ने चेतावनी दी कि बंद के दौरान होने वाले किसी भी नुकसान की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की होगी।