Jharkhand News: राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि टुसू केवल एक लोक पर्व भर नहीं है बल्कि यह प्रकृति और किसान की आत्मा से गहराई से जुड़ा हुआ उत्सव है. उन्होंने कहा कि यह पर्व उस परिश्रम और आशा का प्रतीक है जो किसान पूरे वर्ष खेतों में मेहनत कर बोता है और फसल कटने के बाद समृद्धि की कामना करता है.
मोरहाबादी मैदान में टुसू महोत्सव का आयोजन
राज्यपाल मोरहाबादी मैदान में कुरमाली भाषा परिषद परिवार द्वारा आयोजित एक दिवसीय टुसू महोत्सव को संबोधित कर रहे थे. इस अवसर पर सांसद महुआ माजी, पूर्व सांसद शैलेन्द्र महतो, केंद्रीय राज्य मंत्री संजय सेठ, डॉ राजा राम महतो, शोहदर महतो, डॉ मीना महतो, जयंती मेहता, संजय मेहता और डॉ गोवर्धन मेहता सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे.
फसल और खुशहाली से जुड़ा लोक विश्वास
राज्यपाल ने कहा कि फसल कटने के बाद किसान टुसू को लक्ष्मी का रूप मानकर उसकी पूजा करते हैं और आने वाले समय के लिए खुशहाली और समृद्धि की कामना करते हैं. यह पर्व ग्रामीण जीवन की सामूहिक भावना और प्रकृति के प्रति सम्मान को दर्शाता है.
कार्यक्रम के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ राजाराम महतो ने कहा कि टुसू झारखंड की आत्मा है. गांवों में मनाया जाने वाला यह पर्व अब रांची जैसे शहरों में आकर राज्य की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है. उन्होंने कहा कि यह पर्व नारी शक्ति, भाषा और संस्कृति को जोड़ता है.
लोक परंपराओं को जीवित रखने की कोशिश
डॉ राजाराम महतो ने बताया कि पिछले 25 वर्षों से लगातार टुसू महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है ताकि लोक परंपराएं जीवित रहें. उन्होंने कहा कि टुसू खुशहाली, कृषि और सामूहिक जीवन का प्रतीक है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की जरूरत है.
टुसू महोत्सव केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि झारखंड की ग्रामीण चेतना और किसान जीवन की झलक है. राज्यपाल की मौजूदगी और बड़े मंच से दिए गए संदेश ने इस लोक पर्व को नई पहचान दी है. ऐसे आयोजन लोक संस्कृति को सहेजने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं.