महीनों की मेहनत से आकार ले रहा दिव्य स्वरूप
प्रतिमा की विशालता और बारीकियों को ध्यान में रखते हुए अनुभवी कारीगर पिछले कई महीनों से दिन-रात काम कर रहे हैं। समिति के सदस्यों का मानना है कि इतनी ऊंचाई वाली सरस्वती प्रतिमा इस पूरे क्षेत्र में विरले ही देखने को मिलती है। प्रतिमा के साथ-साथ पंडाल की साज-सज्जा को भी विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए एक यादगार अनुभव साबित होगा।
6 दिनों तक चलेगा भक्ति का उत्सव
पूजा का आयोजन 23 जनवरी से 28 जनवरी तक किया जाएगा। इस दौरान प्रतिदिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठान और भव्य आरती का आयोजन होगा। मुख्य आकर्षण, 31 फीट की विशाल प्रतिमा सांस्कृतिक कार्यक्रम पूजा के दौरान झारखंड की समृद्ध लोक कला और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। सुरक्षा और व्यवस्था, भारी भीड़ की उम्मीद को देखते हुए समिति ने व्यापक तैयारियां की हैं।
संरक्षक का संदेश
पूजा समिति के संरक्षक पहलाद लोहार ने बताया कि इस बार का आयोजन भक्ति और कला का अनूठा संगम होगा। उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और परंपराओं को युवाओं तक पहुंचाना भी है। इस भव्यता को देखने के लिए पड़ोसी राज्यों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। स्थानीय युवाओं में इस आयोजन को लेकर जबरदस्त उत्साह है और विद्यापति नगर पूरी तरह से उत्सव के रंग में डूब चुका है।