Jharkhand News: झारखंड में बिजली और पर्यटन विभाग से जुड़े बहुचर्चित घोटाले ने अब नया मोड़ ले लिया है. CID की जांच के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय ने भी मामले में दखल दे दिया है. सरकारी धन की बड़े पैमाने पर हेराफेरी से जुड़े इस केस में ED की कार्रवाई से आरोपियों की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है.
ED ने दर्ज किया मनी लाउंड्रिंग का केस
करीब 116 करोड़ रुपये के इस घोटाले में ED ने मनी लाउंड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. साल 2026 का यह पहला ईसीआईआर 1/2026 के तहत दर्ज किया गया है. इससे पहले CID इस मामले में अब तक पांच चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. अब ED मनी ट्रेल की गहराई से पड़ताल करेगी.
जेल में बंद आरोपियों से होगी पूछताछ
मामले में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया बिरसा चौक शाखा के तत्कालीन मैनेजर लोलस लकड़ा, बिचौलिया रोशन कुमार चतुर्वेदी, कुशल बनर्जी उर्फ अमित मुखर्जी और अरुण कुमार पांडे बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार में बंद हैं. ED को इन आरोपियों से जेल में पूछताछ की अनुमति पीएमएलए कोर्ट से मिल चुकी है. पूछताछ के दौरान मनी लाउंड्रिंग से जुड़े अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.
कई अधिकारियों और बिचौलियों की भूमिका उजागर
जांच में जेटीडीसीएल के अधिकारी गिरिजा प्रसाद और आलोक कुमार केनरा बैंक के सीनियर मैनेजर अमरजीत कुमार, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की श्वेता भगत, बिचौलिया लोकेश्वर साह उर्फ लोकेश, सहयोगी समीर कुमार उर्फ रुद्र, नीलू नायक, फर्जी खाते के लिए दस्तावेज देने वाला संदीप कुमार, कुशल बनर्जी उर्फ अमित मुखर्जी, अरुण पांडेय, रोशन कुमार चतुर्वेदी, अमन कुमार शिर्सवाल समेत अन्य की भूमिका सामने आई है. आने वाले दिनों में और नाम उजागर होने की संभावना है.
सरकारी संस्थाओं को बनाया गया निशाना
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत झारखंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड और झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज मास्टर ट्रस्ट जैसी संस्थाओं को निशाना बनाया. पर्यटन विभाग से करीब 10.40 करोड़ रुपये और बिजली विभाग व मास्टर ट्रस्ट से लगभग 106 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई.
2024 में दर्ज हुई थी प्राथमिकी
इस पूरे मामले को लेकर वर्ष 2024 में धुर्वा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. इसके बाद CID ने जांच शुरू की और चार्जशीट दाखिल की. अब ED की जांच से यह मामला और गंभीर हो गया है और मनी लाउंड्रिंग एंगल से पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है.
CID के बाद ED की सक्रियता से साफ है कि 116 करोड़ का यह घोटाला सिर्फ वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे संगठित नेटवर्क काम कर रहा है. मनी लाउंड्रिंग जांच के दौरान बैंकिंग चैनल बिचौलियों और अधिकारियों की भूमिका पर फोकस रहेगा. आने वाले समय में इस मामले में बड़े खुलासे और नई गिरफ्तारियां संभव मानी जा रही हैं.