Jharkhand News: जम्मू कश्मीर के डोडा जिले में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. इस हादसे में शहीद हुए भारतीय सेना के जवानों के पार्थिव शरीर शुक्रवार देर रात जब रांची पहुंचे, तो माहौल गम और गर्व से भर गया. हर आंख नम थी और हर दिल देश के वीर सपूतों को नमन कर रहा था.
एयरपोर्ट पर भावुक माहौल
जैसे ही शहीद जवानों के पार्थिव शरीर बिरसा मुंडा एयरपोर्ट लाए गए, वहां मौजूद लोगों ने मौन श्रद्धांजलि अर्पित की. सेना के जवानों ने शहीदों को अंतिम सलामी दी. प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस के वरीय पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि भी मौके पर मौजूद रहे. कुछ देर के लिए एयरपोर्ट परिसर भारत माता की जय और शहीद अमर रहें के नारों से गूंज उठा.
वित्त मंत्री ने दी श्रद्धांजलि, परिजनों को हर मदद का भरोसा
राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने एयरपोर्ट पर शहीद जवानों के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किए. उन्होंने कहा कि देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले जवानों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता. राज्य सरकार शहीदों के परिजनों के साथ खड़ी है और उन्हें हरसंभव सहायता दी जाएगी.
डोडा में कैसे हुआ हादसा
गौरतलब है कि 22 जनवरी को जम्मू कश्मीर के डोडा जिले में सेना का एक वाहन ऑपरेशनल ड्यूटी के लिए जाते समय अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गया था. इस भीषण हादसे में 10 जवान शहीद हो गए, जबकि 11 अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हो गए. सभी जवान तैनाती स्थल की ओर जा रहे थे.
झारखंड और बंगाल के लाल हुए शहीद
इस हादसे में शहीद जवानों में रांची के तिरिल निवासी अजय लकड़ा और पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के झालदा थाना क्षेत्र के पुंडा गांव निवासी 24 वर्षीय प्रद्युम्न लोहारा भी शामिल हैं. खराब मौसम के कारण विमान सेवा में देरी हुई, जिसके चलते पार्थिव शरीर देर रात रांची पहुंच पाए.
आज होगा अंतिम संस्कार
प्रशासन के अनुसार शनिवार सुबह शहीद प्रद्युम्न लोहारा के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव झालदा, पुरुलिया ले जाया जाएगा. वहीं शहीद अजय लकड़ा का अंतिम संस्कार रांची में पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया जाएगा. पूरे राज्य में वीर जवानों के बलिदान को लेकर गहरा शोक और गर्व का माहौल है.
डोडा सड़क हादसा एक बार फिर यह याद दिलाता है कि देश की सुरक्षा में तैनात जवान हर पल जोखिम उठाते हैं. रांची एयरपोर्ट पर उमड़ा सम्मान और श्रद्धा का सैलाब यह दिखाता है कि शहीदों का बलिदान केवल उनके परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज और राज्य का साझा दुख और गर्व है.