Jamshedpur News: जमशेदपुर में जमीन विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने अपनी खरीदी हुई जमीन पर जबरन अवैध निर्माण कराने और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है. पीड़ित उज्जल मल्लिक स्वर्णकार ने इस संबंध में बिरसानगर थाना प्रभारी को लिखित आवेदन देकर न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई है.
कहां की है जमीन और कैसे हुई खरीद
आवेदन के अनुसार उज्जल मल्लिक स्वर्णकार की जमीन मौजा दूरसंग, जोन नंबर 3, थाना बिरसानगर क्षेत्र में स्थित है. खाता नंबर 55, वार्ड नंबर 17 और प्लॉट नंबर 2628 की यह जमीन करीब 1595 वर्गफुट की है. पीड़ित का कहना है कि उसने यह जमीन 16 दिसंबर 2024 को 20 लाख रुपये में खरीदी थी. यह राशि बैंक के माध्यम से आरटीजीएस और चेक के जरिए अदा की गई थी. पीड़ित के अनुसार जमीन सौदे के समय प्रकाश लकड़ा, उनकी पत्नी उषा पूनम और जगजीत सिंह मौजूद थे. इन सभी ने बताया था कि जमीन का पावर ऑफ अटॉर्नी राजेन्द्र सिंह बलबीर सिंह गिल को दिया गया है और उसी आधार पर उनसे सौदा किया जा सकता है. इन्हीं बातों पर भरोसा कर पूरी रकम राजेन्द्र सिंह बलबीर सिंह गिल के खाते में जमा की गई.
मौत के बाद बदला रुख
शिकायत में बताया गया है कि जुलाई 2025 में राजेन्द्र सिंह बलबीर सिंह गिल के निधन के बाद स्थिति बदल गई. इसके बाद संबंधित लोग कथित तौर पर पीड़ित को धमकाने लगे और जमीन तथा दिए गए पैसे को भूल जाने की बात कहने लगे. पीड़ित का आरोप है कि उसकी जानकारी के बिना जमीन को वैभव उपाध्याय को अवैध रूप से बेच दिया गया. इसके बाद उसकी जमीन पर जबरन निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया. जब उसने इसका विरोध किया तो सभी आरोपियों ने उसे और उसके परिवार को जान से मारने और खून खराबा करने की धमकी दी.
परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता
उज्जल मल्लिक स्वर्णकार ने अपने आवेदन में कहा है कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण वह और उसका पूरा परिवार भय के माहौल में जीने को मजबूर है. उसे आशंका है कि आरोपियों द्वारा उसकी हत्या तक कराई जा सकती है. उसने पूरे मामले को आपसी साजिश बताते हुए 20 लाख रुपये की ठगी और जमीन से बेदखली का आरोप लगाया है.
पुलिस से कार्रवाई की मांग
पीड़ित ने बिरसानगर थाना से सभी आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और अपनी तथा अपने परिवार की जान माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. आवेदन मिलने के बाद पुलिस स्तर पर मामले की जांच की संभावना जताई जा रही है.
यह मामला जमीन खरीद बिक्री में पावर ऑफ अटॉर्नी और आपसी भरोसे के जोखिम को उजागर करता है. यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल आपराधिक साजिश बल्कि गंभीर कानून व्यवस्था का सवाल भी बनता है. पुलिस जांच से ही साफ हो सकेगा कि जमीन का वैध हकदार कौन है और अवैध निर्माण के पीछे किसकी भूमिका है.