परिकल्पना के विपरीत बताया
केडिया ने अपने पत्र में कहा कि जमशेदपुर/टाटानगर को झारखंड की वित्तीय एवं औद्योगिक राजधानी कहा जा सकता है, लेकिन एयर कनेक्टिविटी के अभाव में यहां के नागरिकों, उद्योगपतियों, व्यवसायियों, सरकारी अधिकारियों, विद्यार्थियों एवं आम जनता को रांची अथवा कोलकाता जाकर हवाई यात्रा करनी पड़ती है, जिससे अत्यधिक असुविधा होती है। उन्होंने इसे “विकसित भारत” और “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” की परिकल्पना के विपरीत बताया।
पत्र में वर्ष 2019 में धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना के शिलान्यास का उल्लेख करते हुए बताया गया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास एवं तत्कालीन केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री जयंत सिन्हा द्वारा इस परियोजना की आधारशिला रखी गई थी तथा एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) एवं झारखंड सरकार के बीच एमओयू भी हुआ था, परंतु वन एवं पर्यावरण संबंधी आपत्तियों के कारण यह परियोजना पिछले लगभग छह वर्षों से ठप पड़ी है।
टाटा स्टील एवं टाउन प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण
केडिया ने एक व्यावहारिक विकल्प सुझाते हुए कहा कि जब तक स्थायी एयरपोर्ट परियोजना आगे नहीं बढ़ती, तब तक सोनारी एयरपोर्ट, जमशेदपुर में मामूली संशोधन कर तुरंत क्षेत्रीय हवाई सेवा शुरू की जा सकती है। वर्तमान रनवे से छोटे टर्बोप्रॉप विमान (जैसे HAL DO-228) के माध्यम से जमशेदपुर-कोलकाता एवं अन्य शहरों के बीच दैनिक उड़ानें शुरू की जा सकती हैं। साथ ही, रनवे विस्तार की संभावनाएं भी हैं, जिसमें टाटा स्टील एवं टाउन प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट एवं हवाई सेवा से न केवल आवागमन में सुविधा मिलेगी, बल्कि व्यापार, उद्योग, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण, सड़क सुरक्षा एवं सरकारी राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
अंत में मानव केडिया ने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार जमशेदपुर जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक शहर की इस जायज मांग पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर नागरिकों को राहत प्रदान करेगी।