National News: रूस-यूक्रेन युद्ध के चार साल बाद दुनिया एक बार फिर भीषण ऊर्जा संकट की दहलीज पर खड़ी है. मिडिल ईस्ट (एशियाई खाड़ी देशों) में इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग ने एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) की सप्लाई चेन को खतरे में डाल दिया है. रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबा खिंचा, तो भारत समेत दुनिया भर में घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कीमतों में भारी उछाल आना तय है.
ऊर्जा सप्लाई का “चोक पॉइंट” बना जी का जंजाल
इस पूरे संकट का केंद्र “होर्मुज जलडमरूमध्य” (Strait of Hormuz) है. यह वह संकरा समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत एलएनजी सप्लाई होकर गुजरती है. हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध के डर से कई एलएनजी टैंकरों ने अपनी यात्रा रोक दी है या वे वैकल्पिक सुरक्षित रास्तों की तलाश कर रहे हैं. अगर यह रास्ता प्रभावित होता है, तो वैश्विक बाजार में गैस की किल्लत पैदा हो जाएगी, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ेगा.
कतर और ईरान की सप्लाई पर टिकी नजरें
कतर दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी निर्यातकों में से एक है और भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा यहीं से आयात करता है. आंकड़ों के अनुसार, कतर ने साल 2025 में 82.2 मिलियन टन एलएनजी का निर्यात किया था. कोलंबिया यूनिवर्सिटी की रिसर्चर ऐनी-सोफी कॉर्ब्यू के अनुसार, इस सप्लाई का कोई दूसरा विकल्प मौजूद नहीं है. वहीं, ईरान से तुर्की को होने वाली गैस सप्लाई भी पहले ही प्रभावित हो चुकी है, जिससे यूरोपीय और एशियाई बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है.
भारत और एशिया पर क्यों होगा सबसे ज्यादा असर?
यूरोप ने पिछले कुछ वर्षों में गैस का भंडार (बफर स्टॉक) जमा कर लिया है, लेकिन भारत और चीन जैसे एशियाई देशों के पास गैस स्टोर करने की क्षमता सीमित है. हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सीधे तौर पर खाड़ी देशों से होने वाले आयात पर निर्भर हैं.
ब्रेंट क्रूड का असर: भारत के अधिकांश गैस समझौते कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतों से जुड़े होते हैं. युद्ध के कारण अगर तेल महंगा होता है, तो एलपीजी के दाम अपने आप बढ़ जाएंगे.
सप्लाई में रुकावट: कतर के रास लाफान गैस प्लांट में चल रहे मेंटेनेंस ने पहले ही उत्पादन कम कर रखा है, ऊपर से युद्ध की स्थिति ने आग में घी डालने का काम किया है.
क्या वाकई महंगे होंगे घरेलू गैस सिलेंडर?
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों पर दबाव साफ दिख रहा है. जानकारों का कहना है कि अगर होर्मुज के रास्ते से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह ठप हुई, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं. ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार के लिए घरेलू गैस सिलेंडरों (14.2 किलो) के दाम स्थिर रखना बड़ी चुनौती होगी. हालांकि, अंतिम निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा कि खाड़ी देशों में शांति बहाली कितनी जल्दी होती है.