Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग (पश्चिमी वन प्रमंडल) में पदस्थापित सहायक वन संरक्षक (ACF) अविनाश कुमार परमार के खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है. गुरुवार को न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है. कोर्ट ने कहा है कि अगली सुनवाई तक परमार के खिलाफ विभागीय प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी.
मामला कैसे शुरू हुआ
दरअसल, अविनाश कुमार परमार ने अपने ही वन विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. इन आरोपों को लेकर उन्होंने झारखण्ड हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने फिलहाल विभागीय कार्रवाई पर रोक लगा दी.
अंतरिम जांच रिपोर्ट दबाने का आरोप
याचिका में परमार ने कहा कि उन्होंने एक मामले में अंतरिम जांच रिपोर्ट तैयार कर अपने वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी थी, लेकिन वन संरक्षक स्तर पर इस रिपोर्ट को करीब पांच महीने तक दबाकर रखा गया. उनका आरोप है कि रिपोर्ट पर जानबूझकर कार्रवाई नहीं की गई.
जांच प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
परमार ने यह भी आरोप लगाया कि बाद में क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक रविंद्र नाथ मिश्रा के निर्देश पर वन संरक्षक ममता परियादर्शी ने उसी अधिकारी से रिपोर्ट की समीक्षा करवाई, जिसके खिलाफ उन्होंने जांच कमिटी गठित की थी. परमार का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष जांच के नियमों के खिलाफ है.
नियमों के उल्लंघन का आरोप
याचिका में यह भी कहा गया है कि डीएफओ मौन प्रकाश ने संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट को नजरअंदाज करते हुए पर्यावरणीय अनुमति (EC) के आधार पर जंगल कटाई से जुड़े वन संरक्षण अधिनियम (FC) के उल्लंघन को सही ठहराने की कोशिश की, जबकि EC में FC उल्लंघन को वैध नहीं माना गया है.
केंद्र सरकार की रिपोर्ट का भी जिक्र
परमार ने अदालत को बताया कि भारत सरकार के क्षेत्रीय कार्यालय की रिपोर्ट में भी वन संरक्षण कानून के उल्लंघन की पुष्टि हुई थी. जांच समिति के दोनों सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई थी, लेकिन प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने केवल एक अधिकारी पर कार्रवाई का सुझाव दिया.
फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है. अदालत की अगली सुनवाई में इस पूरे विवाद पर आगे की स्थिति साफ हो सकती है.