Indian Railway News: भारतीय रेलवे में लगातार सामने आ रहे रेल हादसों के बीच रेलवे बोर्ड की नई रिपोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 में ट्रैक से जुड़े कुल 28 रेल हादसों में से 18 हादसे सिर्फ “टर्नआउट” पर हुए. यानी करीब 65 प्रतिशत दुर्घटनाएं उसी जगह हुईं जहां ट्रेनें एक ट्रैक से दूसरे ट्रैक पर बदली जाती हैं.
रेलवे बोर्ड ने इसे बेहद गंभीर स्थिति बताते हुए सभी रेलवे जोनों को तुरंत सतर्क रहने और संवेदनशील हिस्सों पर विशेष निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया है.
क्या होता है टर्नआउट और क्यों बन रहा खतरा?
टर्नआउट रेलवे ट्रैक का वह महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जहां ट्रेन को एक लाइन से दूसरी लाइन पर भेजा जाता है. इसे आम भाषा में “पॉइंट” भी कहा जाता है. यहां ट्रैक, मशीन और सिग्नल का तालमेल पूरी तरह सही होना जरूरी होता है.
अगर टर्नआउट में तकनीकी खराबी, घिसावट, रखरखाव की कमी या निरीक्षण में लापरवाही हो जाए, तो ट्रेन के पटरी से उतरने का खतरा काफी बढ़ जाता है. रेलवे बोर्ड की रिपोर्ट के बाद अब यह साफ हो गया है कि रेलवे नेटवर्क के ये हिस्से सबसे कमजोर कड़ी बनते जा रहे हैं.
हजारों पुराने रेलवे प्रोजेक्ट अब भी अधूरे
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि रेलवे के कई महत्वपूर्ण ट्रैक और सुरक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट वर्षों से अधूरे पड़े हैं.
• देशभर में 141 रेलवे परियोजनाएं ऐसी हैं जो 10 साल से भी अधिक समय से लंबित हैं.
• इन अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए अभी भी लगभग 1,334 करोड़ की जरूरत है.
• इसके अलावा करीब 2,000 रेलवे परियोजनाएं 5 साल से अधिक समय से देरी का सामना कर रही हैं.
इन परियोजनाओं में ट्रैक नवीनीकरण, पुलों की मरम्मत, सिग्नल सिस्टम अपग्रेड और सुरक्षा ढांचे से जुड़े कई अहम कार्य शामिल हैं.
किन जगहों को रेलवे ने बताया सबसे संवेदनशील?
रेलवे बोर्ड ने सभी जोनों को निर्देश दिया है कि निम्नलिखित हिस्सों पर तुरंत विशेष ध्यान दिया जाए—
• टर्नआउट
• पुराने और कमजोर रेलवे पुल
• तेज मोड़ वाले ट्रैक (Sharp Curves)
• ऊंचे रेलवे बांध (High Embankments)
• लेवल क्रॉसिंग
रेलवे का मानना है कि इन जगहों पर छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है.
रेलवे बोर्ड की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह है कि रेलवे बोर्ड ने खुद माना है कि कई बार अधिकारी रेल हादसों के असली कारणों की सही पहचान और विश्लेषण नहीं कर पा रहे हैं.
यानी समस्या केवल ट्रैक या इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित नहीं है, बल्कि जांच प्रक्रिया, निरीक्षण व्यवस्था और जवाबदेही पर भी सवाल उठ रहे हैं. यदि हादसों की असली वजह समय पर सामने नहीं आएगी, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना और मुश्किल हो सकता है.
करोड़ों यात्रियों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है और हर दिन करोड़ों लोग ट्रेनों से सफर करते हैं. ऐसे में सुरक्षा केवल हादसे के बाद जांच तक सीमित नहीं रह सकती.
विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे को अब “रिएक्टिव सिस्टम” से आगे बढ़कर “प्रिवेंटिव सिस्टम” अपनाने की जरूरत है. इसके लिए जरूरी है—
• नियमित और आधुनिक ट्रैक निरीक्षण
• समय पर ट्रैक व टर्नआउट का रखरखाव
• लंबित परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना
• जिम्मेदार अधिकारियों की स्पष्ट जवाबदेही
• ग्राउंड लेवल पर वास्तविक निरीक्षण
रेलवे बोर्ड की इस रिपोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि अगर समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो भविष्य में बड़े हादसों का खतरा बना रह सकता है.